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हार के बाद TMC में खिंची तलवार, ममता के अपने ही नेताओं ने खोली पार्टी की पोल!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से बड़ी हार मिलने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर खुलकर नाराजगी सामने आने लगी है। वर्षों तक पार्टी लाइन पर चलने वाले नेता अब खुलकर बता रहे हैं कि पार्टी में क्या गलत हुआ।

सबसे पहले पूर्व खेल राज्यमंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने ममता सरकार को “भ्रष्ट” बताते हुए कहा कि जनता ने सही फैसला लिया। इसके बाद अभिनेता और सांसद देव समेत कई नेताओं ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ नेताओं ने तो सीधे अभिषेक बनर्जी को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।

मुर्शिदाबाद के हरिहरपाड़ा से जीते टीएमसी विधायक नियामत शेख ने कहा कि पार्टी गुटबाजी से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। उनके मुताबिक जिले में कई गुट बन गए थे और एक गुट दूसरे उम्मीदवार के लिए काम ही नहीं करता था। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने बार-बार चेतावनी के बावजूद इस समस्या को नजरअंदाज किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने सोशल मीडिया और तकनीक पर ज्यादा भरोसा किया और जमीनी कार्यकर्ताओं की अहमियत कम कर दी।

कई नेताओं ने मुस्लिम वोटों के बंटने को भी हार की बड़ी वजह बताया। TMC विधायक अखरुज्जमान ने कहा कि इस बार मुस्लिम वोट अलग-अलग पार्टियों में बंट गए, जबकि पहले ज्यादातर वोट टीएमसी को मिलते थे।

वहीं एक अन्य TMC विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुस्लिम वोट बैंक टूट गया और हिंदू वोट भाजपा की तरफ एकजुट हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अब पूरी तरह I-PAC जैसी प्रोफेशनल एजेंसियों पर निर्भर हो गई थी और जमीनी नेताओं की आवाज ऊपर तक नहीं पहुंच रही थी।

कई नेताओं ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के फैसले पर भी सवाल उठाए। बगनान से विधायक अरुणाभ सेन ने कहा कि अगर वह मुख्यमंत्री होते तो इतनी बड़ी हार के बाद इस्तीफा दे देते।

हालांकि कुछ नेता अब भी ममता के साथ खड़े नजर आए। मालदा की विधायक सबीना यासमीन ने माना कि संगठन में कमियां थीं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें ममता बनर्जी पर पूरा भरोसा है।

कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (SIR) और केंद्रीय बलों की मौजूदगी को भी हार की वजह बताया।

इस बीच पार्टी ने अपने ही पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है, क्योंकि उन्होंने चुनाव हारने के बाद पार्टी विरोधी बयान दिए थे। इनमें कोहिनूर मजूमदार, कृष्णेंदु नारायण चौधरी और रिजु दत्ता जैसे नाम शामिल हैं।

अभिनेता देव ने भी खुलासा किया कि उन्हें और जनता को घाताल मास्टरप्लान को लेकर बड़े वादे किए गए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया।

वहीं मनोज तिवारी ने फेसबुक लाइव में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उनसे मिलना तक नहीं चाहती थीं और उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने भाजपा की जीत को “जनता का फैसला” बताते हुए कहा कि TMC के सत्ता से बाहर होने से उन्हें राहत मिली है।

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