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45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!
45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।

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