stock-markett.online
US-Iran War:  अमेरिका-ईरान जंग के बीच रूस ने क्यों भेजा ‘तबाही वाला प्लेन’? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह
US-Iran War:  अमेरिका-ईरान जंग के बीच रूस ने क्यों भेजा ‘तबाही वाला प्लेन’? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

US-Iran War: अमेरिका-ईरान जंग के बीच रूस ने क्यों भेजा ‘तबाही वाला प्लेन’? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और लगातार सैन्य हमले किए जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच रूस की गतिविधियों ने भी दुनिया का ध्यान खींचा है। रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन ईरान भेजा है।

रूस ने भेजा ये खतरनाक विमान

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन टीयू-214पीयू (Tu-214PU) ईरान की सीमा के पास भेजा है। यह विमान किसी भी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति में सरकार के शीर्ष नेतृत्व के लिए कमांड और नियंत्रण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। टीयू-214पीयू को अक्सर अमेरिका के उन स्पेशल प्लेन जैसा माना जाता है, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन हालात में सरकार और सेना के संचालन के लिए किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के दौरान यह विमान तेहरान पहुंचा।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद भी अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। बताया जा रहा है कि युद्धविराम ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और पिछले सप्ताह इस अहम समुद्री मार्ग पर हुए हमलों के बाद हालात फिर बिगड़ गए। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि रूसी कमांड विमान की यह तैनाती रूस और ईरान के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों का संकेत है। उनके अनुसार, ईरान में इस विमान की मौजूदगी दिखाती है कि क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग जारी है।

Tu-214PU की खासियतें

टीयू-214पीयू (Tu-214PU) रूस के टुपोलेव Tu-214 यात्री विमान का विशेष सैन्य और कमांड संस्करण है। इसे अनौपचारिक तौर पर “डूम्सडे प्लेन” यानी संकट या युद्ध जैसी आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला विमान भी कहा जाता है। यह विमान रूस के राष्ट्रपति और देश के शीर्ष अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक संचार (कम्युनिकेशन) और कमांड सिस्टम लगाए गए हैं, जिनकी मदद से बड़े अधिकारी हवा में रहते हुए भी सरकारी और सैन्य कामकाज का संचालन कर सकते हैं।

इस विमान के नाम में “पीयू (PU)” का मतलब रूसी भाषा में उड़ता हुआ कमांड पोस्ट होता है। दिखने में यह सामान्य यात्री विमान जैसा लगता है, लेकिन इसके अंदर पूरी तरह अलग और सुरक्षित कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विशेष उपकरण लगाए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से कमांड और नियंत्रण किया जा सके।

आसमान में उड़ता कमांड सेंटर

इस विमान को रूस के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक चलता-फिरता कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें ऐसे आधुनिक रेडियो और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं, जिनकी मदद से राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारी यात्रा के दौरान भी सरकारी और सैन्य कामकाज संभाल सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस विमान की अधिकतम क्रूज़िंग स्पीड करीब 850 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी उड़ान क्षमता लगभग 6,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह बिना रुके लंबी दूरी तय कर सकता है। इसी वजह से इसे दुनिया के दूसरे वीआईपी कमांड विमानों की श्रेणी में रखा जाता है। इसका एक और उन्नत सैन्य संस्करण Tu-214PU-SBUS भी है, जिसमें और बेहतर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली लगी होने की बात कही जाती है।

पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव

रूस के इस विशेष विमान के पहुंचने के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सोमवार, 13 जुलाई को दावा किया कि उसने कुवैत में मौजूद अली अल-सलेम एयर बेस पर ईंधन भंडारण टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। इसके अलावा अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर लगे एक रडार सिस्टम पर भी हमला करने का दावा किया गया। कुवैत को अमेरिका का करीबी सहयोगी देश माना जाता है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले अमेरिका के खिलाफ चलाए जा रहे उसके “आंख के बदले आंख” अभियान के तीसरे चरण का हिस्सा हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई है। साथ ही उसने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे अभियान जारी रह सकते हैं।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *