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FII-DII Holding: RBL Bank से Coforge तक, इन 5 शेयरों से विदेशी और घरेलू निवेशकों ने बनाई दूरी, एक तिमाही में 24% तक घटाई हिस्सेदारी
FII-DII Holding: RBL Bank से Coforge तक, इन 5 शेयरों से विदेशी और घरेलू निवेशकों ने बनाई दूरी, एक तिमाही में 24% तक घटाई हिस्सेदारी

FII-DII Holding: RBL Bank से Coforge तक, इन 5 शेयरों से विदेशी और घरेलू निवेशकों ने बनाई दूरी, एक तिमाही में 24% तक घटाई हिस्सेदारी

FII DII Holding: शेयर बाजार में किसी कंपनी की शेयरहोल्डिंग में बदलाव को निवेशक काफी अहम संकेत मानते हैं। खासकर जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) दोनों एक ही तिमाही में किसी स्टॉक में अपनी हिस्सेदारी घटा दें, तो बाजार की नजर उस कंपनी पर और बढ़ जाती है। जून 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग (Shareholding Pattern) आंकड़ों में ऐसे पांच प्रमुख शेयर सामने आए हैं, जहां दोनों बड़े निवेशक की कैटेगरी ने अपनी हिस्सेदारी कम की है।

इस सूची में RBL Bank, Coforge, ICICI Bank, Paisalo Digital और Bliss GVS Pharma शामिल हैं। हालांकि, केवल हिस्सेदारी घटना किसी कंपनी के कमजोर होने का प्रमाण नहीं होता। कई बार फंड हाउस मुनाफावसूली, पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग या सेक्टर अलोकेशन की रणनीति के तहत भी अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं। फिर भी जब FII और DII दोनों एक साथ हिस्सेदारी कम करें, तो निवेशक आमतौर पर उसके पीछे की वजहों पर नजर रखते हैं।

RBL Bank में सबसे बड़ा बदलाव

RBL Bank के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। जून 2026 तिमाही में प्रमोटर हिस्सेदारी 0 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गई, जबकि संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी कमी आई। विदेशी निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी 20.23 फीसदी से घटकर 8.77 फीसदी रह गई। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी अपनी हिस्सेदारी 42.97 फीसदी से घटाकर 16.92 फीसदी कर दी यानी तकरीबन 24 फीसदी की कटौती। यह बदलाव शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बड़े रिस्ट्रक्चर का संकेत देता है, जिस पर बाजार की नजर बनी हुई है।

Coforge में भी FII और DII दोनों ने हिस्सेदारी घटाई

आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Coforge में भी दोनों निवेशक कैटेगरी ने एक्सपोजर कम किया। जून तिमाही में FII हिस्सेदारी 30.66 फीसदी से घटकर 24.66 फीसदी रह गई। वहीं DII की हिस्सेदारी 56.18 फीसदी से घटकर 42.71 फीसदी पर आ गई। हालांकि कंपनी का बिजनेस मजबूत माना जाता है, लेकिन शेयरहोल्डिंग में आई यह कमी इस बात का संकेत देती है कि कुछ बड़े संस्थागत निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव किया है।

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ICICI Bank में भी संस्थागत हिस्सेदारी घटी

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में शामिल ICICI Bank में भी जून तिमाही के दौरान दोनों निवेशक कैटेगरी ने हिस्सेदारी कम की। विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 43.87 फीसदी से घटकर 34.48 फीसदी हो गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों का हिस्सा 46.74 फीसदी से घटकर 39.94 फीसदी पर आ गया। हालांकि बैंक के ऑपरेशनल और एसेट क्वालिटी को लेकर बाजार का नजरिया अभी भी पॉजिटिव माना जाता है, लेकिन शेयरहोल्डिंग में आई यह कमी निवेशकों के लिए एक अहम संकेत है।

Paisalo Digital से भी घटा संस्थागत भरोसा

NBFC सेक्टर की कंपनी Paisalo Digital में भी FII और DII दोनों ने अपनी हिस्सेदारी कम की। विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 17.55 फीसदी से घटकर 6.79 फीसदी रह गई, जबकि DII की हिस्सेदारी 6.84 फीसदी से घटकर 6.83 फीसदी पर आ गई। दूसरी ओर, प्रमोटर हिस्सेदारी 41.75 फीसदी से बढ़कर 46.71 फीसदी हो गई, जिससे कंपनी में प्रमोटर की पकड़ मजबूत हुई है।

Bliss GVS Pharma में भी बिकवाली

फार्मा कंपनी Bliss GVS Pharma में भी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी घटी है। जून तिमाही में FII की हिस्सेदारी 14.54 फीसदी से घटकर 10.45 फीसदी रह गई, जबकि DII की हिस्सेदारी 5.78 फीसदी से घटकर 5.04 फीसदी पर आ गई। प्रमोटर हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 35.36 फीसदी पर स्थिर रही।

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एक नजर में सभी के बारे में

कंपनी मौजूदा भाव (₹) मार्केट कैप 52-वीक हाई (₹) 52-वीक लो (₹)
RBL Bank 377 ₹58,311 करोड़ 382 243
Coforge 1,525 ₹65,575 करोड़ 1,990 1,008
ICICI Bank 1,398 ₹10,02,905 करोड़ 1,500 1,188
Paisalo Digital 72.30 ₹6,579 करोड़ 75.0 29.9
Bliss GVS Pharma 535 ₹5,674 करोड़ 553 118

क्या निवेशकों कोचिंतित होना चाहिए?

किसी स्टॉक में FII और DII की हिस्सेदारी घटना निश्चित रूप से एक ऐसा संकेत है जिस पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन केवल इसी आधार पर निवेश या बिकवाली का फैसला लेना सही नहीं होगा। संस्थागत निवेशक समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते रहते हैं। इसके पीछे वैल्यूएशन, सेक्टर रोटेशन, मुनाफावसूली, नकदी प्रबंधन या निवेश रणनीति जैसे कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि वे शेयरहोल्डिंग के साथ-साथ कंपनी के वित्तीय नतीजे, मुनाफे की वृद्धि, बिजनेस आउटलुक, मैनेजमेंट की रणनीति और वैल्यूएशन जैसे पहलुओं का भी आकलन करें। तभी किसी निवेश संबंधी निर्णय पर पहुंचना अधिक उचित होगा।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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