Loan Guarantor Risk: गारंटर बनना पड़ सकता है भारी! EMI डिफॉल्ट होने पर कैसे क्रेडिट स्कोर से लेकर संपत्ति तक पड़ सकता है असर
Loan Guarantor Risk: जब आप किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन के पेपर्स पर साइन करते हैं, तो ये महज गवाही नहीं होती, बल्कि कानूनी तौर पर कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी आपके कंधों पर आ जाती है। इसका सबसे अधिक असर रिटायर लोगों पर पड़ता है। जिनके पास इनकम के सीमित साधन होते हैं।
यहां पर लोन गारंटर आपके लोन के आवेदन पर हस्ताक्षर कर गारंटी देता है और लोन पास हो गया। ऐसा में सवाल उठता है कि अगर लोन लेने वाला व्यक्ति उधार समय पर नहीं चुकातो तो गारंटर की क्या जिम्मेदारी बनती है? यहां बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से लोन लेना और किसी के लिए गारंटर (Loan Guarantor) बनना एक वित्तीय जिम्मेदारी है। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के लोन के लिए गारंटर बन जाते हैं। लेकिन जब उधार लेने वाला समय पर लोन का रिपेमेंट करने में असमर्थ होता है, तो बैंक उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर देता है।
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Loan Guarantor Risk: गारंटर बनने के हैं कुछ रिस्क
जब लोन लेने लेने वाला व्यकित 3 ईएमआई का भुगतान समय पर नहीं करता है। बैंक उसे डिफॉल्टर घोषित कर सकता है। ऐसी स्थिति में, उधार लेने वाले के साथ-साथ गारंटर को भी फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि उसने लोन चुकाने की जिम्मेदारी कागजों पर ली है। इसलिए गारंटर बनने से पहले बेहद सोच-समझकर ही कदम उठाएं।। इसके संभावित जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण है।
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Loan Guarantor Risk: सिबिल स्कोर पर पड़ता है असर
बैंक का कोई लोन अकाउंट जब डिफॉल्ट करता है तो सबसे पहले बैंक सिबिल को जानकारी दी जाती है। वह जो जानकारी देगा, उसमें उधार लेने वाले के पैन नंबर के साथ गारंटर का पैन नंबर भी रहता है। इसका सीधा मतलब यह है, कि कोई लोन अकाउंट डिफॉल्ट होता है, तो गारंटर का भी क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है। इसके बाद गारंटर को भी उस बैंक क्या, किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन नहीं मिलेगा।
Loan Guarantor Risk: डिफॉल्ट घोषित
इसके अलावा बैंक का लोन अकाउंट डिफॉल्ट होने पर पहले वह मूल उधारकर्ता की संपत्ति जब्त कर पैसा वसूल करने का प्रयास करता है। यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो बैंक के पास अधिकार है कि वह गारंटर की संपत्ति को जब्त करे। उससे रकम और ब्याज की वसूली करे। कागज पर तो गारंटर को पहले ही डिफॉल्ट घोषित कर दिया जाता है।
Loan Guarantor Risk: ये भी जरूर जानें
जब कोई व्यक्ति किसी लोन अकाउंट में गारंटर बनता है, तो वह लोन के आवेदन पर भी हस्ताक्षर करता है। उसी समय बैंक और गारंटर के बीच एक समझौता होता है। जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा होता है, कि यदि लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर बकाये का भुगतान नहीं करता। ऐसे में गारंटर को बकाया राशि ब्याज सहित चुकानी होगी। ऐसी स्थिति में, बैंक कानूनी रूप से गारंटर से लोन वसूल करने का हकदार हो जाता है।
क्या लोन गारंटर से अपना नाम हटा सकते हैं?
www.paisabazaar.com के अनुसार, एक बार लोन गारंटर बनने के बाद, लोन गारंटर की भूमिका से अपना नाम हटाने के लिए आपको लोन लेने वाले व्यक्ति और बैंक/लोन संस्थान में रिक्वेस्ट करनी होगी। आप इससे तब तक नहीं निकल सकते जब तक लेंडर और प्राइमरी/को-बॉरोवर किसी नए अन्य गारंटर को मंज़ूरी नहीं दे देते। इसीलिए, गारंटर बनने से पहले सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी है।

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