Rashmi Saluja : सेबी ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के पूर्व चीफ को पाया दोषी, क्या है मामला?
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में रेलिगेयर एंटरप्राइजेज (Religare Enterprises) के पूर्व चेयरपर्सन रश्मी सलूजा (Rashmi Saluja) को दोषी पाया है। मामला Burman Group के प्रस्तावित ओपन ऑफर से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व चीफ रश्मि सलूजा ने गोपनीय जानकारी सार्वजनिक होने से पहले कंपनी के शेयर बेचे, जिससे संभावित नुकसान से बचा जा सका। रेगुलेटर ने इसे इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन माना है।
सेबी ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि रश्मि सलूजा ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के शेयरों में उस समय ट्रेडिंग की, जब उनके पास कंपनी से जुड़ी ऐसी गोपनीय और कीमतों को प्रभावित करने वाली जानकारी (unpublished price sensitive information-UPSI) मौजूद थी, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई थी।
सेबी के मुताबिक, यह गोपनीय जानकारी बर्मन ग्रुप की ओर से रेलिगेयर एंटरप्राइजेज में आने वाले ओपन ऑफर से जुड़ी थी। आदेश में कहा गया है कि 20 सितंबर 2023 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई एक बैठक में रश्मि सलूजा को प्रस्तावित ओपन ऑफर की जानकारी दी गई थी। इस बैठक में एस सी बर्मन (A C Burman) और अर्जुन लांबा (Arjun Lamba) भी मौजूद थे।
सेबी ने पाया कि इसके बाद रश्मि सलूजा ने 21 और 22 सितंबर 2023 को UPSI अवधि के दौरान रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के करीब 12.93 लाख शेयर बेच दिए, जिनकी कुल कीमत लगभग 34.7 करोड़ रुपये थी। रेगुलेटर के अनुसार, इस कदम से उन्होंने करीब 1.99 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान से खुद को बचा लिया, क्योंकि यह जानकारी उस समय तक बाजार में सार्वजनिक नहीं हुई थी।
सेबी ने रश्मि सलूजा को 1.99 करोड़ रुपये 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस जमा कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन पर 40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि यह रकम 45 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। सेबी ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध सबूतों और परिस्थितियों के आधार पर आरोप साबित होते हैं।
(खबर अपडेट हो रही है..)

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