पीएम मोदी ने पुतिन को गिफ्ट किया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद, जानिए क्या है ये और कौन थे इसे लिखने वाले संत तिरुवल्लुवर?
PM Modi & Putin Meeting: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारतीय संस्कृति और साहित्य की अनूठी झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य के महान और कालजयी ग्रंथ तिरुक्कुरल (Thirukkural) का विशेष रूप से तैयार किया गया रूसी अनुवाद भेंट किया। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने वाले इस तोहफे के बाद एक बार फिर महान तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल और इसके रचयिता संत तिरुवल्लुवर की चर्चा पूरी दुनिया में शुरू हो गई है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin hold a bilateral meeting on the sidelines of BRICS Summit 2026.
(Video Source: DD News) pic.twitter.com/KhlCIatMI2
— ANI (@ANI) September 11, 2026
क्या है तिरुक्कुरल ग्रंथ?
तिरुक्कुरल (तमिल में इसका अर्थ पवित्र दोहे या संक्षेप में ‘कुरल’ है) तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और असरदार मानी जाने वाली कालजयी रचना है। इस महान ग्रंथ का तमिल संस्कृति, जीवनशैली और दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। यह ग्रंथ कुल 1330 संक्षिप्त दोहों (कुरल) का एक अद्वितीय संग्रह है। ये दोहे जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि नैतिकता, सुशासन, प्रेम, अर्थ और आध्यात्मिकता पर कालातीत विजडम यानी कि ज्ञान देते हैं। इसके दोहे बहुत ही संक्षिप्त, सटीक और काव्यात्मक रूप में लिखे गए हैं। इस वजह से इन्हें आसानी से याद रखा जा सकता है और जीवन में उतारा जा सकता है।
तीन प्रमुख खंडों में विभाजित है ग्रंथ की संरचना
तिरुक्कुरल को मुख्य रूप से तीन प्रमुख भागों या पुस्तकों में विभाजित किया गया है। इन्हें अराम’, ‘पोरुल’ और ‘इन्बम’ कहा जाता है।
अराम (Aram – धर्म/सद्गुण): इस खंड में धार्मिकता, सत्य, कृतज्ञता और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों और सद्गुणों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों का पालन करने और धर्म परायण जीवन जीने के महत्व पर जोर देता है।
पोरुल (Porul – अर्थ/धन और शासन): यह भाग सांसारिक मामलों, शासन कला, अर्थव्यवस्था और मित्रता के बारे में प्रैक्टिकल इनसाइट है। इसमें धन प्रबंधन, कुशल प्रशासन और अच्छे संग के महत्व के बारे में बताया गया है।
इन्बम (Inbam – काम/प्रेम): यह खंड मानवीय भावनाओं, प्रेम और पारिवारिक जीवन की जटिलताओं और सुंदरता की गहराई में ले जाता है।
कौन थे संत तिरुवल्लुवर?
संत तिरुवल्लुवर को तमिल संस्कृति और इतिहास के सबसे प्रमुख और आदरणीय साहित्यिक शख्सियतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि संत तिरुवल्लुवर ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर पांचवीं शताब्दी के बीच तमिल साहित्य के स्वर्ण काल यानी संगम काल के दौरान थे। उनका जन्म मायलापुर (मौजूदा चेन्नई का हिस्सा) के एक साधारण परिवार में हुआ था। तिरुवल्लुवर को सिर्फ एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक और संत के रूप में भी जाना जाता है। उनके द्वारा लिखा गया ‘तिरुक्कुरल’ आज भी दुनिया भर के लोगों को सही जीवन जीने और सुशासन का मार्ग दिखाता है।
आपको बता दें कि पीएम मोदी अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देते हैं। इससे पहले भी वह विश्व नेताओं को भगवद्गीता, उपनिषद और तमिल ग्रंथ भेंट कर चुके हैं। ऐसे में पुतिन को उनकी यह भेंट दोनों देशों के बीच न सिर्फ रणनीतिक और आर्थिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों की ओर भी इशारा करती है।
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