RBI ने एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज किया, जानिए क्या है इसका मतलब
आरबीआई ने टाटा संस की एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का अप्लिकेशन खारिज कर दिया है। टाटा संस ने स्वैच्छिक रूप से बतौर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) अपना सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अप्लेकिशन दिया था। सूत्रों ने सीएनबीसी-टीवी18 को यह जानकारी दी।
RBI के टाटा संस का अप्लिकेशन खारिज कर देने का मतलब है कि टाटा संस को अब अपर-लेयर एनबीएफसी के लिए तय केंद्रीय बैंक के नियमों का पालन करना होगा। उसे खुद को स्टॉक एक्सचेंजों में भी लिस्ट कराना होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। टाटा संस टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।
इस डेवलपमेंट से टाटा संस के रेगुलेटरी दर्जे को लेकर कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है। Tata Sons ने मार्च 2024 में कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के अपने रजिस्ट्रेशन को सररेंडर करने के लिए अप्लिकेशन दिया था। इससे पहले उसने 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज तय समय से पहले चुका दिया था। इससे FY24 में टाटा समूह की यह होल्डिंग कंपनी कैश पॉजिटिव हो गई थी।
RBI ने टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी फ्रेमवर्क में बनाए रखा है। केंद्रीय बैंक ने इस साल अगस्त में अपर लेयर वाली 17 एनबीएफसी की लिस्ट में टाटा संस को बनाए रखा। उसने कहा था कि लिस्ट में शामिल होने और लाइसेंस सरेंडर करने के टाटा संस के अप्लिकेशन के बीच कोई संबंध नहीं है। उसने कहा था टाटा संस के अप्लिकेशन पर विचार चल रहा है।
RBI ने टाटा संस को पहली बार सितंबर 2022 में अपर-लेयर एनबीएफसी की लिस्ट में शामिल किया था। पहले के नियम के मुताबिक, अपर-लेयर एनबीएफसी को खुद को तीन साल के अंदर लिस्ट कराना जरूरी था। इस हिसाब से टाटा संस को खुद को सितंबर 2025 तक स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराना जरूरी था। लेकिन, डीरजिस्ट्रेशन का अप्लिकेशन लंबित होने के चलते कंपनी ने खुद को लिस्ट नहीं कराया।
RBI ने बाद में अपर-लेयर एनबीएफसी के नियमों में बदलाव किया। इसके मुताबिक, एक लाख करोड़ या इससे ज्यादा एसेट्स वाली एनबीएफसी को अपर-लेयर की कैटेगरी में रखा गया है। टाटा संस का एसेट इस लिमिट से ज्यादा है। इसका मतलब है कि नियमों में बदलाव के बावजूद टाटा संस अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में है और उसे खुद को शेयर बाजारों पर लिस्ट कराना होगा।
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