घर में किसी की मौत के बाद सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ दुख नहीं पैसों तक पहुंच न बन पाना भा बन जाता है। कई परिवारों को यह तक नहीं पता होता कि बैंक खाते में जमा रकम, EPF या बीमा पॉलिसी का पैसा कैसे निकाला जाए। सही डॉक्यूमेंट या नॉमिनी की जानकारी न होने पर लोगों को बैंक, दफ्तर और सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हाल ही में ओडिशा की एक घटना ने इसी परेशानी को सामने ला दिया, जहां एक व्यक्ति अपनी बहन की मौत का सबूत देने के लिए उसके अवशेष तक बैंक ले गया। ऐसे मामलों ने यह सवाल और बड़ा कर दिया है कि आखिर किसी रिश्तेदार की मौत के बाद उसका पैसा क्लेम करने का सही तरीका क्या है?
बैंक खाते का पैसा कैसे मिलेगा?
अगर मृत व्यक्ति ने बैंक खाते में नॉमिनी जोड़ा हुआ है, तो प्रोसेस काफी आसान हो जाता है। बैंक आमतौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र, KYC और क्लेम फॉर्म लेकर पैसा जारी कर देता है। लेकिन अगर नॉमिनी नहीं है, तो कानूनी वारिसों को एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट देने पड़ते हैं। जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, लीगल हेयर सर्टिफिकेट, अन्य परिवार वालों का NOC, इंडेम्निटी बॉन्ड आदि देना पड़ता है।
कम रकम वाले मामलों में बैंक बिना सक्सेशन सर्टिफिकेट के भी पेमेंट कर सकते हैं, लेकिन बड़ी रकम या विवाद होने पर कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना पड़ सकता है।
EPF, पेंशन और EDLI का पैसा कैसे क्लेम करें?
अगर EPF अकाउंट में नॉमिनी नहीं है, तब भी परिवार पैसा क्लेम कर सकता है। इसके लिए मृत कर्मचारी के अंतिम नियोक्ता या कंपनी से सरवाइविंग फैमिली मेंबर्स की सर्टिफाई लिस्ट लेनी होती है। इसके अलावा कानूनी उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट के जरिए भी दावा किया जा सकता है। परिवार नियोक्ता की मदद से ऑनलाइन क्लेम दाखिल कर सकता है।
बीमा पॉलिसी में नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी में क्या है अंतर
बीमा मामलों में नॉमिनी होना बहुत अहम माना जाता है। हालांकि नॉमिनी हमेशा अंतिम मालिक नहीं होता। कई लोग यह समझते हैं कि नॉमिनी का मतलब पैसा उसी का हो जाएगा, लेकिन कानून में ऐसा जरूरी नहीं है। अगर नॉमिनी पति-पत्नी, माता-पिता या बच्चे हैं, तो उन्हें बेनिफिशियरी नॉमिनी माना जाता है और बीमा कंपनी आमतौर पर सीधे पैसा जारी कर देती है। लेकिन अगर नॉमिनी कोई अन्य रिश्तेदार है या नॉमिनी दर्ज ही नहीं है, तो पैसा पाने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट, रजिस्टर्ड वसीयत या अन्य कानूनी डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है।
नॉमिनी नहीं हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा कानूनी रास्ता सक्सेशन सर्टिफिकेट होता है, जो सिविल कोर्ट से लिया जाता है। छोटे मामलों में कानूनी उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट भी काम आ सकता है। अगर विवाद हो जाए तो अदालत में केस भी दायर किया जा सकता है।
नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी में क्या अंतर है?
नॉमिनी सिर्फ वह व्यक्ति होता है जिसे बैंक या संस्था पैसा सौंपती है। लेकिन असली अधिकार सक्सेशन कानून या वसीयत के हिसाब से तय होता है। यानी नॉमिनी कई बार सिर्फ custodian यानी जिम्मेदार की भूमिका में होता है, जबकि कानूनी वारिसों का अधिकार अलग हो सकता है।
विवाद से बचने के लिए क्या करें?
सभी बैंक खातों में नॉमिनी अपडेट रखें।
EPF और बीमा पॉलिसी में सही जानकारी दर्ज करें।
समय-समय पर नॉमिनेशन चेक करें।
साफ और वैध वसीयत बनाएं।
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