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इन्वेस्टमेंट टाइम पीरियड क्यों है इतना जरूरी? NIFTY 50 ने किया प्रूफ; पिछले 12 साल में 73% मौके पर मिला 12% से ज्यादा का रिटर्न
इन्वेस्टमेंट टाइम पीरियड क्यों है इतना जरूरी? NIFTY 50 ने किया प्रूफ; पिछले 12 साल में 73% मौके पर मिला 12% से ज्यादा का रिटर्न

इन्वेस्टमेंट टाइम पीरियड क्यों है इतना जरूरी? NIFTY 50 ने किया प्रूफ; पिछले 12 साल में 73% मौके पर मिला 12% से ज्यादा का रिटर्न

Stock Market Return: शेयर बाजार में निवेशक अक्सर डबल डिजिट रिटर्न की उम्मीद रखते हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए 5 साल, 10 साल या 12 साल में से कौन सा समय सही है। बाजार कभी तेजी से ऊपर जाता है तो कभी गिरावट भी देखने को मिलती है। लेकिन इन्वेस्टमेंट पीरियड जितना लंबा होता है, उतना ही बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता दिखाई देता है।

Funds India के रोलिंग रिटर्न डेटा के मुताबिक, Nifty 50 TRI के 12 साल के अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड्स को देखें तो 73% मौकों पर सालाना रिटर्न 12% से ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 12 सालों में एक भी बार ऐसा नहीं हुआ जब किसी ने 12 साल तक निवेश रखा हो और उसे नेगेटिव रिटर्न मिला हो।

73% मौकों पर मिला 12% से ज्यादा रिटर्न

यहां 73% के आंकड़े को समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि Nifty 50 ने 12 साल में 73% रिटर्न दिया। दरअसल, अलग-अलग तारीखों से 12 साल का निवेश मानकर हर बार Nifty 50 का CAGR निकाला गया। इनमें से 73% मामलों में 12 साल की अवधि में CAGR 12% से ज्यादा रहा।

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Stock Market Return: ये है रिटर्न का हिसाब-किताब

औसत एनुअलाइज्ड रिटर्न करीब 14% रहा।

सबसे ज्यादा एनुअलाइज्ड रिटर्न करीब 22% रहा।

सबसे कम एनुअलाइज्ड रिटर्न करीब 6% रहा।

करीब 73% पीरियड्स में रिटर्न 12% से ज्यादा रहा।

करीब 90% पीरियड्स में रिटर्न 10% से ज्यादा रहा।

करीब 99% पीरियड्स में रिटर्न 7% से ज्यादा रहा।

1 लाख पर 12% रिटर्न कितना बना?

मान लीजिए किसी इन्वेस्टर ने Nifty 50 में 1 लाख रुपये लगाए और उसे 12 साल तक लगातार 12% CAGR मिला होता तो 12 साल बाद यह रकम बढ़कर करीब 3.90 रुपये लाख हो जाती।

वन टाइम इन्वेस्टमेंट : 1 लाख रुपये

रिटर्न : 12% CAGR

12 साल बाद रकम : करीब 3.90 लाख रुपये

कुल मुनाफा : करीब 2.90 लाख रुपये

एब्सोल्यूट रिटर्न : 290%

इसका मतलब 12% CAGR मिलने पर 12 साल में कुल यानी एब्सोल्यूट रिटर्न करीब 290% होता है। ध्यान रखें कि 12% CAGR और 12% कुल रिटर्न एक जैसी चीज नहीं हैं। CAGR हर साल मिलने वाले औसत कम्पाउंडेड रिटर्न को बताता है।

निवेश में सही टाइम पीरियड है जरूरी

Funds India के इस डेटा से यह समझ आता है कि शेयर बाजार में निवेश की अवधि बढ़ने के साथ बाजार के छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव का असर कम करने का मौका मिलता है। खासकर NIFTY 50 जैसे बड़े इंडेक्स में लॉन्ग टर्म तक निवेश करने पर निवेशक को कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।

डेटा यह भी दिखाता है कि 5 साल, 10 साल या 12 साल जैसी अलग-अलग टाइम पीरियड में रिटर्न अलग हो सकता है। लंबे समय तक निवेश रखने से बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो सकता है और पैसे पर कम्पाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

Report : Funds India

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