NSE IPO से पहले बदल रहा एक्सचेंज गेम? BSE के डेरिवेटिव्स कारोबार में तेज उछाल, 38.7% पहुंचा मार्केट शेयर
BSE Derivatives amid NSE IPO: भारतीय शेयर बाजार में NSE के IPO को लेकर हलचल के बीच एक्सचेंज कारोबार का एक और पहलू तेजी से चर्चा में आ रहा है। BSE ने डेरिवेटिव्स सेगमेंट में हाल के दिनों में जिस रफ्तार से अपनी पकड़ मजबूत की है, उसने एक्सचेंज बिजनेस में कंपटीशन की तस्वीर को दिलचस्प बना दिया है। ब्रोकरेज फर्म Nuvama Research की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, BSE के डेरिवेटिव्स कारोबार के कई अहम पैमानों में इंडस्ट्री की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
27% बढ़ी ADPTV
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते बीएसई (BSE Share) का Average Daily Premium Turnover यानी ADPTV करीब 27,100 करोड़ रुपये रहा। इसमें एक हफ्ते के मुकाबले 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पूरे इंडस्ट्री का ADPTV इस दौरान करीब 12.4 फीसदी बढ़ा। यानी जिस रफ्तार से डेरिवेटिव्स मार्केट बढ़ा, उसके मुकाबले BSE की ग्रोथ लगभग दोगुने से ज्यादा रही। इसका असर BSE की मार्केट शेयर पर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ADPTV के आधार पर BSE की हिस्सेदारी बढ़कर 38.7 फीसदी हो गई। सिर्फ एक हफ्ते में इसमें 445 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा हुआ है। FY27 में अब तक देखें तो BSE का ADPTV करीब 26,300 करोड़ रुपये के आसपास रहा है और मार्केट शेयर लगभग 35.3 फीसदी है।
कॉन्ट्रैक्ट में भी BSE की तेज रफ्तार
BSE की बढ़ती पकड़ सिर्फ प्रीमियम टर्वओवर तक सीमित नहीं है। डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या में भी एक्सचेंज ने इंडस्ट्री से बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, BSE पर Average Daily Contracts करीब 12.7 करोड़ रहे, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 20.4 फीसदी ज्यादा हैं। इसके मुकाबले इंडस्ट्री के एवरजे डेली कॉन्ट्रैक्ट्स में करीब 9.1 फीसदी की वृद्धि हुई। यानी कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या के लिहाज से BSE की ग्रोथ मार्केट की कुल ग्रोथ से काफी तेज रही।
रिपोर्ट में इंडेक्स ऑप्शन में BSE की मार्केट शेयर करीब 39 फीसदी, जबकि कॉन्ट्रैक्ट वॉल्यूम के आधार पर हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी बताई गई है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में BSE अब सिर्फ एक सेकेंडरी प्लेयर की भूमिका तक सीमित नहीं दिख रहा।
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लेकिन सिर्फ वॉल्यूम की कहानी नहीं
हालांकि, BSE के बढ़ते कारोबार की तस्वीर को केवल मार्केट शेयर और कॉन्ट्रैक्ट्स से देखना पूरी कहानी नहीं बताएगा। BSE की Average Premium per Contract भी करीब 5.5 फीसदी बढ़कर 2,139 रुपये हुई है। वहीं Premium-to-Notional टर्नओवर रेशियो BSE के लिए करीब 12.5 बेसिस प्वाइंट रहा, जबकि इंडस्ट्री का आंकड़ा 17.2 bp है। यही अंतर एक अहम सवाल खड़ा करता है कि क्या बढ़ते हुए वॉल्यूम उसी रेशियो में रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी में भी बदल रहे हैं?
NSE IPO के बीच क्यों अहम है BSE?
NSE के IPO की प्रक्रिया और उससे जुड़ी वैल्यूएशन चर्चा के बीच एक्सचेंज बिजनेस को लेकर बाजार की नजर ट्रेडिंग वॉल्यूम, डेरिवेटिव्स एक्टिविटी और उससे होने वाली कमाई पर रहेगी। ऐसे समय में BSE के डेरिवेटिव्स कारोबार की तेज ग्रोथ एक अहम कंपैरिजन प्वाइंट बन सकती है।
BSE के लिए यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि FY27 के दौरान अब तक उसका डेरिवेटिव्स ADPTV मार्केट शेयर करीब 35.3 फीसदी रहा है, जबकि हालिया हफ्ते में यह 38.7 फीसदी तक पहुंच गया। अगर यह बढ़ी हुई एक्टिविटी आगे भी बनी रहती है, तो एक्सचेंज सेक्टर में मुकाबले को सिर्फ NSE की मौजूदा मार्केट लीडरशिप के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा।
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Disclaimer: शेयर को लेकर सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई हैं। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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