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IT कंपनियों के लिए वरदान बना ट्रंप का सस्पेंशन, एक दिन में कमा लिए ₹70,000 करोड़
IT कंपनियों के लिए वरदान बना ट्रंप का सस्पेंशन, एक दिन में कमा लिए ₹70,000 करोड़

IT कंपनियों के लिए वरदान बना ट्रंप का सस्पेंशन, एक दिन में कमा लिए ₹70,000 करोड़

अमेरिका ने कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, कैपजेमिनी, विप्रो, टीसीएस और एचसीएल को ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। माना जा रहा था कि इससे आज इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आएगी। लेकिन इन कंपनियों के शेयरों में आज भारी तेजी आई और आईटी स्टॉक्स सबसे ज्यादा फायदे में रहे। निफ्टी IT इंडेक्स 4% से ज्यादा चढ़ गया। इस तेजी से आईटी कंपनियों का मार्केट कैप में 70,000 करोड़ रुपये जुड़ गए।

विप्रो लगभग 3% से ज्यादा बढ़कर 164.25 रुपये तक उछला। इसी तरह TCS अपने Q2 रिजल्ट के बाद 6% से ज्यादा उछलकर 2,204 के दिन के हाई पर पहुंच गया। HCLTech और Tech Mahindra के शेयरों में भी 3-3% तेजी आई। इसी तरह Coforge और Persistent Systems जैसे मिडकैप स्टॉक्स में क्रमशः 3% और 4% की तेजी आई।

क्यों उछले IT शेयर?

OpenAI अपने रेवेन्यू रन-रेट के अनुमान से चूक गया। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी ने इन्वेस्टर्स को बताया कि सितंबर के लिए उसका सालाना रेवेन्यू लगभग $50 बिलियन था, जो उसके पहले बताए गए आंकड़े से कम है। OpenAI ने पहले एक अलग इवेंट में इन्वेस्टर्स को बताया था कि सितंबर के लिए उसका रेवेन्यू रन रेट $70 बिलियन के करीब पहुंच रहा था। यह इस चिंता को भी कम कर सकता है कि AI कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं कि पारंपरिक IT सर्विसेज के लिए खतरा बन सकती हैं।

TCS का मजबूत रिजल्ट

भारत की सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनी टीसीएस ने दूसरी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की है। बोर्ड ने FY27 के लिए 12 रुपये प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड घोषित किया। कॉन्स्टेंट-करेंसी टर्म्स में रेवेन्यू पिछली तिमाही के मुकाबले 0.5% बढ़ा। ऑपरेटिंग मार्जिन 24% रहा जबकि नेट मार्जिन 19% रहा। नोमुरा ने TCS पर अपनी Buy रेटिंग बनाए रखी और 2,630 का प्राइस टारगेट दिया है

मार्केट का मूड अच्छा

सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से ज्यादा तेजी आई और इसके साथ ही आठ हफ्ते की गिरावट का सिलसिला टूट गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में मिडटर्म इलेक्शन तक ईरान पर हमला न करने की बात कही है। इससे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में कमी आई। इसका असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।

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