Jyeshtha Pradosh Vrat 2026: एकादशी व्रत की तरह प्रदोष व्रत भी हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। यह व्रत भी एकादशी व्रत की तरह साल में 24 बार किया जाता है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में प्रदोष व्रत की पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। हर माह की तरह ज्येष्ठ माह में भी कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी का व्रत पहला प्रदोष व्रत होगा।
मई महीने का प्रदोष व्रत जल्द ही पड़ने वाला है। शिवभक्तों को हर महीने आने वाले प्रदोष व्रत का बेसब्री से इंतजार होता है। लोग दिनभर उपवास रखकर शाम के समय प्रदोष काल में पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से इस व्रत को करने से सारे कष्ट दूर होते हैं। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन के नाम पर होता है, जिस दिन त्रयोदशी तिथि पड़ती है। जैसे पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार को होगा। इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।
गुरु प्रदोष व्रत की तारीख
ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 की सुबह 11:20 बजे से हो जाएगी। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 15 मई की सुबह 8:31 बजे तक होगा। होगी। प्रदोष काल 14 मई को मिल रहा है, इसलिए ये व्रत 14 मई को होगा। इस दिन गुरुवार होगा तो इस प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
गुरु प्रदोष व्रत पूजा शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ कृष्ण प्रदोष व्रत के लिए 14 मई की शाम में गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 5:22 बजे से लेकर 7:04 बजे तक है। यह अवधि 1 घंटा 42 मिनट की है। इस समय में पूजा करना शुभ होगा।
गुरु प्रदोष व्रत में ये गलतियों करने से बचें
गुरु प्रदोष व्रत में ध्यान रखें कि मन में नकारात्मक विचार ना आएं। ना ही इस दिन किसी पर गुस्सा करें। इस दिन किसी के लिए कोई खराब अपशब्द भी नहीं कहना चाहिए। इस दिन भगवान शिव की पूजा शांत और पवित्र मन से करना ही फलदायी माना जाता है। इसके अलावा व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस-मछली और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इससे व्रत का पुण्य कम हो सकता है। प्रदोष काल के समय पूजा करने में लापरवाही ना करें।

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