कौन हैं IIT Bombay के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? छात्र की मौत के बाद क्यों गई डीन की कुर्सी
शुक्रवार को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एक छात्र के सुसाइड मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जांच के दायरे में आ गए हैं, जिस वजह से संस्थान ने उनसे डीन का पद छीन लिया है। बताया जा रहा है कि BTech के इस द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से ठीक पहले हुई घटना के समय डूला ही इंस्ट्रक्टर और परीक्षा के इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे।
खबरों के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने सोमवार को सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़ी अपनी पहले की कुछ बातों को वापस ले लिया।
IIT बॉम्बे ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। संस्थान ने इन दावों के लिए माफी भी मांगी है।
कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला?
LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, डूला पावर सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के रिसर्चर हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे में 17 साल से ज्यादा समय बिताया है।
उनका एकेडमिक काम स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, पावर-सिस्टम कंट्रोल और डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स के इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।
उनकी प्रोफाइल में बताई गई रिसर्च की मौजूदा रुचियों में स्मार्ट ग्रिड और माइक्रोग्रिड, कन्वर्टर टोपोलॉजी और कंट्रोल, पावर सिस्टम के लिए कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स का ग्रिड इंटीग्रेशन, और पावर सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल शामिल हैं।
सूर्यनारायण डूला के प्रोफाइल में बताया गया है कि उनका एकेडमिक बैकग्राउंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर सिस्टम्स पर आधारित है।
IIT बॉम्बे में 17 साल
डूला सितंबर 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर IIT बॉम्बे से जुड़े और मार्च 2015 तक इस पद पर रहे। इसके बाद, मार्च 2015 से जुलाई 2019 तक वे एसोसिएट प्रोफेसर रहे।
उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, जुलाई 2019 से वे IIT बॉम्बे में फुल-टाइम प्रोफेसर हैं।
उन्होंने मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया। जुलाई 2026 में उन्होंने डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स का पद संभाला। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे अभी भी इस पद पर हैं।
इस तरह, डूला IIT बॉम्बे में शिक्षण और रिसर्च के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।
एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड
IIT बॉम्बे में शामिल होने से पहले, डूला ने जनवरी से सितंबर 2009 के बीच ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ में पावर-सिस्टम कंसल्टिंग का काम किया।
इससे पहले, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच ‘मशीन 2 मशीन’ में आर्किटेक्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने 2002-03 में एलुरु के CRR कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया।
डूला की एकेडमिक क्वालिफिकेशन भी पावर और एनर्जी सिस्टम के क्षेत्र में ही हैं। उन्होंने 2004 से 2006 के बीच IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में PhD पूरी की। उससे पहले, उन्होंने 2000 से 2002 के बीच IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग में M.Tech किया।
उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीच आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।
विवाद के केंद्र में क्यों हैं डूला?
डूला इस विवाद के केंद्र में इसलिए आए क्योंकि वे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के बयान में कहा गया है कि उन्होंने एक छात्र को बिना इजाजत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था।
फैकल्टी फोरम ने बताया कि डूला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा की निगरानी कर रहे फोरम के मुताबिक, उन्होंने जिस घटना को शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया, उसे देखने के बाद उन्होंने संस्थान के नियमों के अनुसार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वे संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
बता दें कि IIT बॉम्बे के पहले के बयान में कहा गया था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और जवाब पाने के लिए प्रश्न-पत्र को ChatGPT पर अपलोड किया।
बाद में संस्थान ने इस बात के लिए माफी मांगी कि उसने जांच की सही प्रक्रिया से पुष्टि होने से पहले ही ये विवरण सार्वजनिक कर दिए थे।
प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस केस दर्ज
वहीं, छात्र के माता-पिता की ओर से उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह विवाद बढ़ गया।
इसके बाद डूल्ला को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज की गई। आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने तीन महीने तक छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।
फिलहाल, मामले को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। डूल्ला पर लगे आरोप अभी चल रही जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अभी तक तथ्य के तौर पर साबित नहीं किया गया है।
बता दें कि यह घटनाक्रम कैंपस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और संस्थान से जवाबदेही की बढ़ती मांगों के बीच सामने आया। इसके बाद IIT बॉम्बे ने डूल्ला की डीनशिप सस्पेंड कर दी और साथ ही घटनाओं के बारे में अपनी पिछली बात भी वापस ले ली।
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