जियो प्लेटफॉर्म्स दूसरे देशों में अपनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी मॉडल का इस्तेमाल करेगी, आकाश अंबानी ने बताय पूरा प्लान
जियो प्लेटफॉर्म्स अपने एसेट-लाइट मॉडल के जरिए विदेश में अपनी सेवाओं का विस्तार करना चाहती है। इससे कंपनी को अपनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने का मौका मिलेगा। इसके लिए कंपनी दुनियाभर के बाजारों में ऑपरेटर्स से पार्टनरशिप करेगी। कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को इस बारे में बताया।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबानी ने कहा कि जियो खुद को नेटवर्क बिल्डर या कनवेंशनल सॉफ्टेवयर सर्विसेज प्रोवाइडर के बजाय मैनेज्ड सर्विसेज पार्टनर के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसके लिए कंपनी भारत में विकिसत और इस्तेमाल किए जा रहे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दूसरे देशों में करेगी।
उन्होंने कहा कि जियो का प्रॉपरायटरी एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक दुनिया के सबसे जटिल टेलीकॉम मार्केट्स में तैयार किया गया है। इसका भारत में इस्तेमाल हो रहा है। हमारे लिए इसका इस्तेमाल दूसरे देशों में करने का मौका है। इसके लिए विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में ऑपरेटर्स से पार्टनरशिप के मौके हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी विदेश में अपनी सेवाओं के विस्तार के लिए खुद को मैनेज्ड सर्विसेज पार्टनर के रूप में पेश करेगी। इससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपनी ग्रोथ के लिए सिर्फ नेटवर्क बिल्डर या सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर बनने की जगह हमारी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
अंबानी ने कहा कि जियो इंटरनेशनल पार्टनर्स के चुनाव में सावधानी बरतेगी। इसके लिए वह बाजार के आकार और अपनी बैलेंसशीट में संभावित योगदान के आधार फैसले लेगी। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेटेजी से आने वाले सालों में कंपनी को टेक्नोलॉजी में अपने निवेश का फायदा उठाने का रास्ता मिलेगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन ने कहा कि जियो ने अपना टेलीकॉम टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने के लिए बड़ा निवेश किया है। कंपनी ने 7,220 से ज्यादा पेटेंट्स फाइल किए हैं। इन्हें कंपनी के 12,000 से ज्यादा इंजीनियर्स ने तैयार किए हैं। कंपनी ने भारत में 5जी का व्यापक नेटवर्क बनाया है। उन्होंने इसे चीन के बाहर सबसे बड़ा 5जी सब्सक्राइबर बेस बताया।
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