विजय नहीं… तो क्या 2 विधायक वाली पार्टी का नेता बनेगा CM? तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर!
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सुपरस्टार विजय की पार्टी (TVK) ने चुनावी मैदान में ‘ब्लॉकबस्टर’ प्रदर्शन तो किया, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से चूकने के कारण अब सरकार बनाने की चाबी छोटे दलों के हाथ में आ गई है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, गठबंधन की इस खींचतान में एक ऐसा नाम मुख्यमंत्री की रेस में उभरकर आ रहा है, जिसने सबको चौंका दिया है- विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन।
अजीब है मगर मुमकिन है: केवल 2 विधायक और CM की दावेदारी?
सुनने में यह भले ही अजीब लगे कि 234 सीटों वाली विधानसभा में जिस पार्टी के पास सिर्फ 2 विधायक (1% से भी कम) हों, वो मुख्यमंत्री पद का दावा कैसे कर सकती है? लेकिन गठबंधन की राजनीति में ‘असंभव’ शब्द के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ गणित से ज्यादा समीकरण मायने रखते हैं।
तमिलनाडु में सरकार बनाने की स्थिति फिलहाल कुछ इस तरह है:
थलपति विजय (TVK): विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उनके पास वर्तमान में 116 विधायकों का समर्थन है। बहुमत के लिए उन्हें केवल 2 और विधायकों की जरूरत है।
VCK की भूमिका: थिरुमावलवन की पार्टी VCK के पास ठीक 2 विधायक हैं। अगर ये दो विधायक विजय को समर्थन दे देते हैं, तो उनकी सरकार आसानी से बन जाएगी।
क्यों हो रही है देरी?
सूत्रों के अनुसार, VCK के दो विधायकों में से एक अभी चेन्नई नहीं पहुंचा है। पार्टी का कहना है कि जब तक दोनों विधायक साथ नहीं आ जाते और हस्ताक्षर नहीं कर देते, तब तक वे कोई अंतिम फैसला नहीं लेंगे।
हालांकि, वीसीके प्रवक्ता के. के. पावलन ने कहा कि थिरुमावलवन शाम चार बजे इस संबंध में घोषणा करेंगे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को हुई पार्टी की उच्चस्तरीय समिति की बैठक में थिरुमावलवन को अंतिम घोषणा करने के लिए अधिकृत किया गया।
विजय ने दावा किया कि TTV दिनाकरण की पार्टी AMMK के एकलौते विधायक समर्थन भी उसे मिला है। हालांकि, TTV ने पुलिस में शिकायक कर TVK पर फर्जी समर्थन पत्र देने का आरोप लगाया। साथ ही उसने NDA को समर्थन देने की बात कही है।
क्या थिरुमावलवन बन सकते हैं मुख्यमंत्री?
हां, संवैधानिक रूप से यह संभव है। अगर कोई नेता सदन का सदस्य है और राज्यपाल के सामने बहुमत (118 विधायकों का समर्थन) साबित कर देता है, तो वह मुख्यमंत्री बन सकता है।
इस समय परदे के पीछे एक और बड़ा खेल चल रहा है। पिछले 60 सालों से राज्य पर राज करने वाले दो दिग्गज दल- DMK (59 सीटें) और AIADMK (47 सीटें)—विजय की लहर को रोकने के लिए एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। हालांकि, इन दोनों को मिलाकर भी संख्या केवल 106 तक पहुंचती है, जो बहुमत से दूर है।
आगे क्या?
विजय की पार्टी आज शाम 4 बजे अपना रुख साफ कर सकती है। क्या वह छोटे दलों की बड़ी शर्तें मानकर मुख्यमंत्री बनेंगे, या तमिलनाडु की राजनीति में कोई नया ‘तीसरा चेहरा’ सत्ता की कमान संभालेगा? सबकी नजरें अब चेन्नई के सियासी घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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