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सांप काटने के तुरंत बाद पड़ सकती है ये गलती भारी, जानिए क्या नहीं करें सांप के काटने पर!
सांप काटने के तुरंत बाद पड़ सकती है ये गलती भारी, जानिए क्या नहीं करें सांप के काटने पर!

सांप काटने के तुरंत बाद पड़ सकती है ये गलती भारी, जानिए क्या नहीं करें सांप के काटने पर!

बरसात का मौसम शुरू होते ही सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे गांव के इलाकों में स्नेकबाइट के मामले भी तेजी से सामने आते हैं। ऐसे समय में सही जानकारी और समय पर इलाज किसी की जान बचा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि सांप काटने के बाद घबराने या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना जरूरी है। आइए जानते हैं स्नेकबाइट से बचाव और फर्स्ट एड से जुड़ी जरूरी बातें:

बारिश में बढ़ जाते हैं स्नेकबाइट के केस

बरसात के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, इसलिए वे सेफ और सूखी जगह की तलाश में घरों, खेतों, खलिहानों और पशुशालाओं की ओर निकल आते हैं। इसी वजह से इस मौसम में लोगों का सांपों से सामना ज्यादा होता है और स्नेकबाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

हर सांप जहरीला नहीं होता

एक्सपर्ट कहते है ज्यादातर सांप में जहरीले नहीं होते हैं और पानी में रहने वाले कई सांप भी जहरीले नहीं होते। हालांकि, यदि यह पता न हो कि काटने वाला सांप जहरीला था या नहीं, तो किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

सांप काटने पर मरीज को शांत रखें

स्नेकबाइट के बाद मरीज को घबराने न दें और उसे आराम से लिटाकर रखें। बिना कारण चलने-फिरने से बचाएं, क्योंकि इससे यदि जहर मौजूद हो तो वह शरीर में तेजी से फैल सकता है।

चीरा लगाना और कसकर बांधना है खतरनाक

एक्सपर्ट के मुताबिक, सांप काटने वाली जगह पर ब्लेड या किसी धारदार चीज से चीरा नहीं लगाना चाहिए। इसी तरह रस्सी, कपड़ा या तार कसकर बांधना भी नुकसानदायक हो सकता है और इन्फेक्शन या कम्प्लीकेशन का रिस्क बढ़ सकता है।

बिना देर किए हॉस्पिटल पहुंचाएं

स्नेकबाइट की कंडीशन में मरीज को तुरंत पास के किसी सरकारी अस्पताल या हेल्थ सेंटर ले जाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

झाड़-फूंक नहीं, डॉक्टर का इलाज जरूरी

एक्सपर्ट का कहना है कि झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट लेनी चाहिए। हॉस्पिटल में अवेलेबल एंटी-स्नेक वेनम से समय पर ट्रीटमेंट मिलने पर ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं।

इस तरह स्नेकबाइट की कंडीशन में सही जानकारी और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर साबित हो सकती है, इसलिए हर सिचुएशन में डॉक्टर की एडवाइस और हॉस्पिटल का ट्रीटमेंट ही अपनाएं।

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