सिर्फ प्रोटोटाइप बनकर नहीं दम तोड़ेगी रिसर्च, IIT कानपुर का नया मॉडल लैब के इनोवेशन को बनाएगा बिजनेस
IIT कानपुर: IIT कानपुर ने एक नया प्रोग्राम शुरू किया है, जिससे प्रोफेसरों की रिसर्च को बिजनेस में बदलने और बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। देश के बड़े तकनीकी संस्थानों में सालों की मेहनत के बाद तैयार होने वाली रिसर्च कई बार लैब, पेटेंट या प्रोटोटाइप तक ही रह जाती है। तकनीक तैयार हो जाती है, लेकिन उसे बाजार तक पहुंचाने और उससे कारोबार शुरू करने का रास्ता साफ नहीं हो पाता। अब IIT कानपुर इस परेशानी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। संस्थान ने स्केल ट्रांसेंड नाम से एक कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत प्रोफेसरों की हाईटेक रिसर्च को बाजार की जरूरतों से जोड़कर बिजनेस में बदलने की तैयारी की जाएगी।
रिसर्च को कारोबार में बदलने की मिलेगी ट्रेनिंग
स्केल ट्रांसेंड, IIT कानपुर के उद्यम विकास मंच स्ट्रैटेजिक कैपिटल एंड एडवाइजरी फॉर लॉन्च एंड एक्सपेंशन (SCALE) की पहल है। इसका मकसद प्रोफेसरों की अगुवाई में होने वाली रिसर्च और नए इनोवेशन को कारोबार का रूप देना है। इसके तहत रिसर्च करने वाली टीमों को तकनीकी मदद के साथ यह भी बताया जाएगा कि उनकी तकनीक की बाजार में कितनी मांग है, ग्राहक कौन होंगे और इसे बिजनेस के रूप में कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
10 हफ्ते के पहले बैच में छह प्रोफेसरों के नेतृत्व वाली टीमों को चुना गया है। हर टीम को एक उद्योग विशेषज्ञ का मार्गदर्शन मिलेगा। इसके साथ संस्थान की ओर से आर्थिक मदद और निवेशकों से जुड़ने का मौका भी दिया जाएगा। IIT कानपुर का कहना है कि रिसर्च और कारोबार के बीच की दूरी कम होने से कई नई तकनीकें लैब से निकलकर आम लोगों और उद्योगों तक पहुंच सकेंगी।
छह क्षेत्रों की नई तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
पहले बैच में शामिल प्रोफेसरों की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इनमें तापमान के हिसाब से काम करने वाला स्मार्ट पेंट, लीगल-टेक एआई एजेंट, कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनेमिक्स, कम बिजली में काम करने वाली एज इंटेलिजेंस तकनीक, सल्फर आधारित सुरक्षित बैटरी और मेडिकल-ग्रेड न्यूरोस्टिमुलेशन उपकरण शामिल हैं।
इनमें ऐसी तकनीकें भी हैं, जो ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकती हैं, जबकि कुछ का इस्तेमाल मेडिकल क्षेत्र में नए उपकरण बनाने के लिए किया जा रहा है। सल्फर आधारित बैटरी को अगली पीढ़ी की सुरक्षित बैटरी के विकल्प के तौर पर विकसित किया जा रहा है। वहीं, एआई आधारित तकनीक कानूनी कामकाज को आसान बनाने में मदद कर सकती है।
प्रोफेसरों को कारोबार चलाने का अनुभव भी मिलेगा
IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि संस्थान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नई और आधुनिक तकनीकों पर होने वाला शोध सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे। रिसर्च को ऐसे समाधान में बदला जाए, जिसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो सके और जो देश के विकास में योगदान दे। स्केल ट्रांसेंड के जरिए फैकल्टी इनोवेटर्स को आगे बढ़ने के लिए जरूरी मार्गदर्शन और संसाधन दिए जा रहे हैं।
अच्छी रिसर्च के साथ बिजनेस की समझ भी जरूरी
धनवर्ती एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर और स्केल ट्रांसेंड के आर्किटेक्ट अनुराग सिंह ने कहा कि अच्छी रिसर्च से अपने आप अच्छी कंपनी नहीं बन जाती। फैकल्टी इनोवेटर्स को पैसों के साथ ऐसे लोगों के अनुभव की भी जरूरत होती है, जिन्होंने पहले कारोबार शुरू किया हो और उसे बड़े स्तर तक पहुंचाया हो। स्केल ट्रांसेंड का मकसद हर टीम को आर्थिक मदद के साथ कारोबार चलाने का व्यावहारिक अनुभव देना है, ताकि तकनीक को लैब से निकालकर बाजार तक पहुंचाया जा सके।
बाजार की मांग समझने से लेकर निवेश तक मिलेगी मदद
कार्यक्रम के दौरान उद्योग विशेषज्ञ टीमों को ग्राहकों की जरूरत समझने, बाजार में तकनीक की मांग का अंदाजा लगाने, बिजनेस मॉडल तैयार करने और रिसर्च को कारोबार में बदलने में मदद करेंगे। संस्थान हर टीम को तकनीक विकसित करने और उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता भी देगा। कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट।
Leave a Reply