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सेबी का म्यूचुअल फंड्स के लिए इंट्राडे बॉरोइंग नियमों में बदलाव का प्रस्ताव-पब्लिक से मांगे सुझाव
सेबी का म्यूचुअल फंड्स के लिए इंट्राडे बॉरोइंग नियमों में बदलाव का प्रस्ताव-पब्लिक से मांगे सुझाव

सेबी का म्यूचुअल फंड्स के लिए इंट्राडे बॉरोइंग नियमों में बदलाव का प्रस्ताव-पब्लिक से मांगे सुझाव

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने म्यूचुअल फंड्स को कैश मैनेजमेंट टूल के तौर पर इंट्राडे बॉरोइंग की अनुमति देने के प्रस्ताव पर पब्लिक और मार्कट पार्टिसिपेंट से सुझाव मांगे हैं। सेबी का मानना है कि इंट्राडे बॉरोइंग पेआउट और रिसीवेबल्स के बीच होने वाले टाइमिंग मिसमैच को संतुलित करने में मदद कर सकती है, जिससे फंड मैनेजमेंट अधिक कुशल हो सकेगा। एक्सपर्ट का कहना है कि यह नियम लागू होता है तो म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए डेली के पेमेंट और कैश संभालना आसान हो जाएगा.

अब कक म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को पैसा लौटाने यानी रिडेम्पशन के लिए ही इस तरह का उधार ले सकते हैं। सेबी ने प्रस्ताव रखा है कि म्यूचुअल फंड्स को केवल रिडेम्प्शन और यूनिटहोल्डर पेआउट तक सीमित न रखते हुए ट्रेड सेटलमेंट, फॉरेक्स ऑब्लिगेशन, डेरिवेटिव MTM (मार्क-टू-मार्केट) और बॉरोइंट रीपेमेंट जैसे उद्देश्यों के लिए भी इंट्राडे बॉरोइंग की अनुमति दी जा सकती है। रेगुलेटर ने यह भी कहा कि रिसीवेबल्स की गारंटी न होने की स्थिति में भी इंट्राडे बॉरोइंग की अनुमति मिल सकती है।

रेगुलेटरी शर्तों का पालन करना अनिवार्य

हालांकि दिन के दौरान रिसीवेबल्स से अधिक उधारी लेने की छूट होने पर भी दिन समाप्त होने तक सभी रेगुलेटरी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। सेबी के अनुसार एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि कोई इंट्राडे बॉरोइंग ओवरनाइट बॉरोइंग में बदलती है, तो वह तय रेगुलेटरी सीमा के भीतर रहे। मौजूदा नियमों के मुताबिक म्यूचुअल फंड्स के लिए ओवरनाइट बॉरोइंग स्कीम की कुल एसेट्स के 20 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती और इसकी अवधि अधिकतम 6 महीने तक सीमित रहेगी।

सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंट्राडे बॉरोइंग से जुड़े किसी भी खर्च या शुल्क का बोझ निवेशकों पर नहीं डाला जाएगा। यह खर्च संबंधित AMC को स्वयं वहन करना होगा। इन सभी प्रस्तावों पर सेबी ने 3 जून तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

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