‘हमने बहुत बड़ी गड़बड़ की’ वेंस ने माना कि ट्रम्प प्रशासन ने एपस्टीन फाइलों को जारी करने में ‘गलती’ की
जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ी फाइलों को लेकर लंबे समय से अमेरिका में राजनीतिक बहस चल रही है। वहीं, अब पहली बार अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलकर स्वीकार किया है कि इन फाइलों को सार्वजनिक करने के तरीके में ट्रंप प्रशासन से बड़ी चूक हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार का मकसद किसी जानकारी को छिपाना नहीं था, बल्कि लोगों तक पूरे मामले को सही ढंग से पहुंचाने में कमी रह गई।
बुधवार को जारी “द जो रोगन एक्सपीरियंस” पॉडकास्ट में वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इन फाइलों को लेकर लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ा दी थीं। लेकिन जब फाइलों में लोगों की उम्मीद के मुताबिक कोई बड़ा खुलासा नहीं हुआ, तो सरकार इस बारे में सही तरीके से लोगों से बात नहीं कर पाई और यही सबसे बड़ी गलती रही।
वेंस ने कहा, “अगर लोग कहना चाहते हैं कि हमने एपस्टीन मामले की जानकारी जारी करने में गड़बड़ी की, तो हम दोषी हैं। हमने सच में गड़बड़ी की।” उन्होंने आगे कहा कि समस्या कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी (बातचीत के तरीके) में थी, न कि किसी गलत काम को छिपाने की कोशिश में।
उन्होंने ने कहा, “मैं यह बात पूरी ईमानदारी से कह रहा हूं कि हमने एपस्टीन फाइलों से जुड़ी जानकारी देने में बहुत बड़ी गलती की, जैसा कि अभी हुआ।” “लेकिन क्या मुझे लगता है कि कम्युनिकेशन में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि हम कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे थे? नहीं।”
वेंस ने ट्रंप का बचाव किया
इंटरव्यू के दौरान, वेंस ने एपस्टीन से जुड़े आरोपों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जारी की गई ज्यादातर जानकारी देखी है और उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि ट्रंप ने कोई गलत काम किया है।
वेंस का दावा है कि एपस्टीन के इंटेलिजेंस एजेंसियों से संबंध थे
पॉडकास्ट के दौरान, वाइस प्रेसिडेंट ने इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ एपस्टीन के कथित संबंधों के बारे में भी दावे किए। होस्ट जो रोगन की उन टिप्पणियों का जवाब देते हुए जिनमें एपस्टीन के मोसाद से संबंध होने की अटकलों का जिक्र था, वेंस ने कहा कि एपस्टीन के अमेरिका और इजरायल, दोनों देशों की इंटेलिजेंस एजेंसियों के “सबसे ऊंचे स्तर” के लोगों से संबंध थे।
वेंस ने कहा, “साफ तौर पर जेफ्री एपस्टीन के अमेरिकी इंटेलिजेंस के सबसे ऊंचे स्तरों और इजरायली इंटेलिजेंस के सबसे ऊंचे स्तरों से संबंध थे।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता था कि एपस्टीन के इजरायली “डीप स्टेट” के कुछ ऐसे लोगों से भी संबंध थे, जिन्हें राजनीतिक रूप से वामपंथी (लेफ्ट ऑफ सेंटर) माना जाता है। वेंस ने कहा, “मुझे हमेशा यह बात दिलचस्प लगी कि एपस्टीन के संबंध इजरायल की राजनीति के वामपंथी माने जाने वाले प्रभावशाली लोगों से ज्यादा दिखते हैं। ऐसा नहीं था कि उसके रिश्ते दक्षिणपंथी (राइट ऑफ सेंटर) नेताओं या समूहों से बहुत मजबूत थे।”
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