15,000 रुपये की लाइब्रेरी नौकरी गई, नोएडा की महिला ने नहीं मानी हार, घरेलू काम से अब कमा रही हैं 36,000 रुपये महीना
नोएडा की किरण की कहानी संघर्ष, हिम्मत और बदलाव की मिसाल है। कभी वह एक स्कूल लाइब्रेरी में 15 हजार रुपये महीने की नौकरी करती थीं, लेकिन जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव ने उन्हें कई बार नए सिरे से शुरुआत करने के लिए मजबूर किया। परिवार की जिम्मेदारियों से लेकर कोरोना काल में नौकरी जाने तक, किरण ने हर मुश्किल का सामना किया। घरेलू काम से शुरुआत करने के बाद उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया और अपनी कमाई को बढ़ाकर 30 से 36 हजार रुपये महीने तक पहुंचा दिया।
आज उनकी कहानी सिर्फ आर्थिक बदलाव की नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि सही मौके और मेहनत के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी की दिशा बदल सकता है।
टीचर बनने का सपना अधूरा रह गया
किरण छह भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। पढ़ाई में अच्छी होने के कारण उनका सपना टीचर बनने का था। विज्ञान, गणित और भाषाओं में उनकी अच्छी पकड़ थी और वह आगे पढ़ाई कर अपना करियर बनाना चाहती थीं।
लेकिन साल 2006 में 12वीं की परीक्षा के दौरान पिता के निधन ने उनकी जिंदगी बदल दी। परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई और उन्हें अपने सपनों को पीछे छोड़कर घर संभालने के लिए आगे आना पड़ा।
दिल्ली आईं, मुश्किलों से लड़ते हुए बनाई पहचान
2008 में रोजगार की तलाश में किरण दिल्ली पहुंचीं। शुरुआत आसान नहीं रही। कुछ परेशानियों के कारण उन्होंने एजेंट के जरिए मिली नौकरी छोड़ दी और खुद अवसर तलाशने शुरू किए।
उन्होंने गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे इलाकों में भी काम की तलाश की और आखिरकार नोएडा को अपना ठिकाना बनाया। यहां से उन्होंने अपनी जिंदगी को दोबारा खड़ा करने की शुरुआत की।
ट्यूशन से फैक्ट्री तक, हर काम से सीखा संघर्ष
नोएडा में किरण ने बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाकर कमाई शुरू की। लेकिन इससे घर चलाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं मिल पाते थे।
इसके बाद उन्होंने सेक्टर-63 की एक फैक्ट्री में काम किया, जहां मोबाइल चार्जर पैक करने का काम करती थीं। दिन में 8 से 12 घंटे मेहनत के बावजूद उनकी मासिक आय करीब 12 से 13 हजार रुपये ही थी।
2017 में मिली स्थिर नौकरी, फिर कोरोना ने छीना सहारा
कई संघर्षों के बाद 2017 में किरण को नोएडा के एक स्कूल की लाइब्रेरी में नौकरी मिली। सुबह 7 बजे से शाम 4:30 बजे तक की तय शिफ्ट और 15 हजार रुपये की सैलरी ने उन्हें पहली बार स्थिरता का एहसास कराया।
लेकिन कोरोना महामारी ने एक बार फिर सब बदल दिया। लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद हुए और किरण की नौकरी चली गई। उन्हें दोबारा कमाई के लिए नए रास्ते तलाशने पड़े।
घरों में काम से शुरू हुआ नया संघर्ष
नौकरी जाने के बाद किरण ने घरेलू काम करना शुरू किया। वह अलग-अलग घरों में झाड़ू, पोछा और खाना बनाने का काम करती थीं। रोजाना कई घरों में काम करने के बावजूद उनकी कमाई 12 से 13 हजार रुपये के आसपास ही रह जाती थी।
लंबे घंटे काम करने के बाद भी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आ पा रहा था।
डिजिटल प्लेटफॉर्म बना जिंदगी बदलने वाला मोड़
किरण ने पारंपरिक तरीके से काम ढूंढने के बजाय ऑनलाइन घरेलू काम से जुड़े प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उन्हें सीधे उन परिवारों से जोड़ दिया जिन्हें घरेलू सेवाओं की जरूरत थी।
इस बदलाव से उन्हें काम चुनने की आजादी मिली। वह अपनी सुविधा और समय के हिसाब से काम लेने लगीं और उनकी कमाई तेजी से बढ़ने लगी।
आज बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना पूरा कर रहीं किरण
अब किरण हर महीने 30 से 36 हजार रुपये तक कमा रही हैं, जो उनकी पुरानी नौकरी की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है।
इस बढ़ी हुई आय ने उनके परिवार की जिंदगी भी बदल दी है। अब वह अपने 14 साल के बेटे और 11 साल की बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रही हैं और उन्हें बेहतर भविष्य देने की कोशिश कर रही हैं।
किरण की कहानी बताती है नई अर्थव्यवस्था की ताकत
किरण का सफर दिखाता है कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ ऑफिस और कॉर्पोरेट नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। ये घरेलू काम करने वाले लाखों लोगों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
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