पाकिस्तान के पास अब सिर्फ इतना तेल स्टॉक! ईरान और अमेरिका के वॉर के बीच बिगड़ गया इस्लामाबाद का पूरा हाल
Last Updated on May 3, 2026 0:05, AM by Pawan
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में भले ही पाकिस्तान अपने आप को पोस्टर बॉय बता रहा हो पर अंदर ही अंदर उसकी हालत फटे पोस्टर की तरह है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट लगी है। पाकिस्तान ने माना है कि बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों से निपटना उसके लिए मुश्किल हो रहा है। पाकिस्तान ने यह भी स्वीकार किया कि उसके पास भारत की तरह बड़े रणनीतिक तेल भंडार नहीं हैं, जिनकी मदद से संकट के समय हालात संभाले जा सकें।
पाकिस्तान का हाल बेहाल
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई रूट प्रभावित होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि देश के पास सिर्फ कुछ दिनों का ही तेल स्टॉक बचा है और उसके पास ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं है, जिस पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी, जिससे तेल आयात करने वाले देशों पर भारी दबाव बढ़ गया है। इससे खासकर उन देशों की चिंता बढ़ गई है, जिनके पास तेल का सीमित भंडार है।
पाकिस्तान के पास इतने ही दिनों का बचा स्टॉक
पाकिस्तान इस समय ऊर्जा संकट और तेल की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा कि देश के पास सिर्फ पांच से सात दिनों का कच्चे तेल का भंडार बचा है। इसके अलावा तेल कंपनियों के पास करीब 20 दिनों का रिफाइंड ईंधन स्टॉक मौजूद है। उन्होंने माना कि पाकिस्तान के पास लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए कोई बड़ा रणनीतिक तेल भंडार नहीं है। इसके मुकाबले भारत के पास करीब 60 से 70 दिनों का रणनीतिक और व्यावसायिक तेल भंडार बताया जाता है। इसकी वजह से भारत आपात स्थिति में तेल जारी करके कीमतों को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकता है।
IMF से लगा रहा मदद की गुहार
अली परवेज मलिक ने यह भी कहा कि भारत के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बेहतर आर्थिक योजना ने उसे मौजूदा संकट से ज्यादा आसानी से निपटने में मदद की है। IMF की शर्तों की वजह से पाकिस्तान के लिए हालात संभालना और मुश्किल हो गया है। सरकार को अपने बजट घाटे को नियंत्रित रखने के लिए ईंधन पर ऊंचे टैक्स जारी रखने पड़ रहे हैं। इसी कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ज्यादा राहत देने की गुंजाइश कम हो गई है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने कहा कि कुछ राहत पाने के लिए सरकार को आईएमएफ के साथ परोक्ष रूप से बातचीत करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि मोटरसाइकिल चलाने वालों को मदद देने के लिए सब्सिडी योजना भी शुरू की गई है।
378 रुपए हुई पेट्रोल की कीमत
पाकिस्तान में बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ऊर्जा संकट के कारण देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में पेट्रोल की कीमतों में कुछ कटौती का ऐलान किया था, लेकिन उससे पहले हुई लगातार बढ़ोतरी के कारण पेट्रोल की कीमत करीब 378 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। इससे आम लोगों पर भारी असर पड़ा और कई जगह ईंधन की कमी की स्थिति भी देखने को मिली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। इसकी वजह से तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। खास तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की सप्लाई होती है, वहां स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
