लोन लेने वालों को झटका! HDFC Bank के बाद इन बैंकों ने बदले MCLR, EMI पर पड़ सकता है असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में रेपो रेट में कटौती किए जाने के बावजूद कुछ बड़े बैंकों ने कर्ज को महंगा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। एचडीएफसी बैंक के बाद अब केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05% तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 12 जून से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिनके होम लोन, ऑटो लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज एमसीएलआर से जुड़े हुए हैं। ऐसे ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या कर्ज की अवधि लंबी हो सकती है।
केनरा बैंक के अनुसार, 24 घंटे की अवधि के लिए एमसीएलआर बढ़कर 7.95% हो गई है। एक महीने की एमसीएलआर 8%, तीन महीने की 8.25% और छह महीने की 8.60% कर दी गई है। हालांकि एक साल की एमसीएलआर 8.75% पर अपरिवर्तित रखी गई है। वहीं दो साल और तीन साल की अवधि के लिए एमसीएलआर क्रमशः 9% और 9.05% हो गई है। बैंक की इन संशोधित दरों से नए और कुछ मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी चुनिंदा अवधियों की एमसीएलआर में 0.05% की बढ़ोतरी की है। बैंक की ओवरनाइट एमसीएलआर अब 7.85% हो गई है, जबकि एक महीने की दर 7.95%, तीन महीने की 8.20%, छह महीने की 8.50% और एक साल की 8.75% कर दी गई है। बैंक का कहना है कि संशोधित दरें 12 जून से प्रभावी हैं।
MCLR क्या है और क्यों पड़ता है असर?
एमसीएलआर वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिस पर बैंक ग्राहकों को कर्ज देते हैं। यदि किसी बैंक की एमसीएलआर बढ़ती है, तो उससे जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज भी महंगे हो सकते हैं। हालांकि सभी ग्राहकों पर इसका असर तुरंत नहीं पड़ता। जिन ग्राहकों के लोन की ब्याज दर एमसीएलआर से जुड़ी है, उनकी ब्याज दर अगली रीसेट डेट पर बदल सकती है।

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