नए लेबर कोड्स 9 मई से पूरी तरह से लागू हो गए हैं। सरकार ने इस बारे में नए नियमों को नोटिफाय कर दिया है। इसके साथ ही चारों नए लेबर कोड्स के प्रावधान पूरी तरह लागू हो गए है। इसके साथ ही 29 अलग-अलग नियमों का वजूद खत्म हो गया है। नए लेबर कोड्स का मकसद एंप्लॉयीज के हितों की रक्षा है। साथ ही बिजनेसेज के लिए भी अब नियम पहले से आसान हो गए हैं।
चार नए लेबर कोड्स 21 नवंबर, 2025 को लागू हो गए थे। लेकिन, कुछ से जुड़े डिटेल नियम पेंडिंग होने से वे पूरी तरह से लागू नहीं हुए थे। अब यह कमी दूर हो गई है। चारों नए लेबर कोड्स और उनसे जुड़े नियम पूरी तरह से लागू हो गए हैं। सरकार ने अलग-अलग पक्षों के साथ विचार करने के बाद नए नियम नोटिफाय कर दिए हैं।
एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि नए नियम Gazette में पब्लिश हो जाने के बाद नए लेबर कोड्स अपने पूरे फ्रेमवर्क के साथ पूरी तरह से लागू हो गए हैं। हालांकि, राज्यों को इनसे जुड़े खुद के नियमों को नोटिफाय करना पड़ेगा। इसमें थोड़ा समय लग सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स के पूरी तरह लागू होने के साथ ही लेबर से जुड़े बड़े रिफॉर्म्स पूरे हो गए हैं। सरकार ने 29 पुराने नियमों की जगह चार लेबर कोड्स लागू किए हैं। इसका व्यापक असर पड़ेगा। एंप्लॉयीज के साथ ही बिजनेसेज के लिए चीजें आसान हो जाएंगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ेगा। एंप्लॉयीज का सोशल सिक्योरिटीज कवर भी बढ़ेगा।
वर्कर्स के लिए कई चीजें अब बदल जाएंगी। खासकर वर्कर्स के राइट्स, सेफ्टी और कंपनसेशन से जुड़ी शर्तों पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव काम के घंटों को लेकर है। नए नियम में कहा गया है कि काम के घंटे हर हफ्ते 48 घंटे से ज्यादा नहीं हो सकते। इससे अलग-अलग सेक्टर में काम के घंटों को लेकर समानता आएगी।
एंप्लाॉयीज को हर हफ्ते आराम के लिए कम से कम एक दिन मिलेगा। अगर एंप्लॉयीज ओवरटाइम करता है तो उसे इसके लिए अलग से पैसे मिलेंगे। अभी कई सेक्टर में एंप्लॉयीज को नियमित काम के घंटों के बाद भी ऑफिस में रुकना पड़ता है। यही हाल वर्कर्स के मामले में भी है। लेकिन, अतिरिक्त काम के घंटों के लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं मिलता है।
नए लेबर कोड्स के पूरी तरह से लागू होने के बाद एंप्लॉयर्स के लिए सभी वर्कर्स को अप्वाइंटमेंट लेटर जारी करना अनिवार्य हो गया है। इससे एंप्लॉयर और एंप्लॉयीज के रिश्ते में पारदर्शिता आएगा। एंप्लॉयीज का शोषण करना मुश्किल हो जाएगा। बगैर नियम और शर्त के कोई एंप्लॉयर किसी वर्कर से काम नहीं ले सकेगा।
40 साल से ज्यादा उम्र के एंप्लॉयीज को साल में कम से कम एक बार कंपनी की तरफ से फ्री हेल्थ-चेकअप की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। महिला एंप्लॉयीज को सभी शिफ्ट्स में काम करने की इजाजत दी गई है। लेकिन, एंप्लॉयर को उनकी सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन गंभीरता से करना होगा। सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से जुड़े नियम पहले ही लागू हो चुके हैं। एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी उसकी सीटीसी की कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए।

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