Moody’s: रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताते हुए एक नई रिपोर्ट जारी की है। मूडीज का मानना है कि साल 2020 के बाद से भारत दुनिया की सबसे लचीली उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने उभरते बाजार वाले साथी देशों की तुलना में भविष्य के वैश्विक आर्थिक झटकों को सहने के लिए ‘बेहतर स्थिति’ में है।
क्यों मजबूत है भारतीय इकोनॉमी?
विदेशी मुद्रा भंडार: भारत के पास पर्याप्त और सुलभ विदेशी मुद्रा भंडार है, जो संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।
घरेलू पूंजी बाजार: भारत की घरेलू फंडिंग पर निर्भरता को गहरे स्थानीय बाजारों और बड़े रिजर्व से मजबूती मिलती है।
स्थिर नीति ढांचा: देश का व्यापक आर्थिक नीति वातावरण काफी पूर्वानुमानित और स्थिर है।
नीतिगत फैसलों का मिला फायदा
रेटिंग एजेंसी ने बताया है कि भारत भविष्य की बाहरी अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए अच्छी स्थिति में है। देश का मौद्रिक नीति ढांचा स्पष्ट और पारदर्शी बना हुआ है और महंगाई पर नियंत्रण बना हुआ है। इसके साथ ही विनिमय दर भी स्टेबल है। बता दें कि जरूरत पड़ने पर एक्सचेंज रेट में बदलाव की अनुमति दी जाती है, जिससे बाहरी उतार-चढ़ाव को संभालना आसान होता है।
चुनौतियां और सीमाएं
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति के बावजूद मूडीज ने कुछ प्रमुख जोखिमों की ओर भी संकेत किया है, जिसमें तुलनात्मक रूप से अधिक कर्ज का बोझ और कमजोर राजकोषीय संतुलन शामिल है। ये जोखिम भविष्य में लगातार लगने वाले वैश्विक झटकों पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की सरकारी गुंजाइश को सीमित कर सकते हैं।
इन अर्थव्यवस्थाओं पर हुआ अध्ययन
मूडीज ने अपने अध्ययन में भारत के अलावा इंडोनेशिया, मैक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्की और अर्जेंटीना जैसी प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे इन देशों ने 2020 की महामारी, 2022 के वैश्विक मुद्रास्फीति झटके और 2025 के टैरिफ तनाव जैसे संकटों का सामना किया।

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