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100 रुपये का शेयर महंगा, 10,000 रुपये का शेयर सस्ता! कीमत नहीं, स्मार्ट इन्वेस्टर ऐसे चुनते हैं अपना फेवरेट स्टॉक
100 रुपये का शेयर महंगा, 10,000 रुपये का शेयर सस्ता! कीमत नहीं, स्मार्ट इन्वेस्टर ऐसे चुनते हैं अपना फेवरेट स्टॉक

100 रुपये का शेयर महंगा, 10,000 रुपये का शेयर सस्ता! कीमत नहीं, स्मार्ट इन्वेस्टर ऐसे चुनते हैं अपना फेवरेट स्टॉक

Stock Market Investment Tips: शेयर मार्केट में नए निवेशकों की अक्सर सबसे बड़ी गलतफहमी यह होती है कि कम कीमत वाला शेयर सस्ता होता है और ज्यादा कीमत वाला शेयर महंगा। लेकिन बाजार की हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कई बार 100 रुपये का शेयर भी ओवरवैल्यूड होता है, जबकि 10,000 रुपये का शेयर अपने मजबूत बिजनेस और भविष्य की ग्रोथ के दम पर आकर्षक निवेश साबित हो सकता है। मार्केट एक्सपर्ट सफीर आनंद का भी मानना है कि किसी शेयर का चुनाव केवल उसकी कीमत देखकर नहीं, बल्कि उसके बिजनेस, सेक्टर की संभावनाओं और लंबी अवधि की ग्रोथ को समझकर करना चाहिए।

शेयर की कीमत नहीं, बिजनेस की क्वालिटी सबसे अहम

सफीर आनंद का कहना है कि किसी कंपनी का शेयर 100 रुपये का है या 10,000 रुपये का, इससे यह तय नहीं होता कि वह सस्ता है या महंगा। असली सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में उस कंपनी के कारोबार में कितनी वृद्धि हो सकती है। यदि किसी कंपनी के पास मजबूत बिजनेस मॉडल, लगातार बढ़ती कमाई और भविष्य में विस्तार की अच्छी संभावना है, तो ऊंचे वैल्यूएशन पर भी वह निवेश के लिए आकर्षक हो सकती है।

उनके मुताबिक सफल निवेशक शेयर की मौजूदा कीमत नहीं देखते, बल्कि यह समझने की कोशिश करते हैं कि अगले पांच से दस वर्षों में कंपनी का आकार कितना बड़ा हो सकता है।

सिर्फ टारगेट प्राइस नहीं, पूरे सेक्टर की कहानी समझिए

मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि निवेश का फैसला केवल ब्रोकरेज रिपोर्ट के टारगेट प्राइस देखकर नहीं लेना चाहिए। किसी भी शेयर का भविष्य कई ऐसे कारकों पर निर्भर करता है, जिनका अनुमान लगाना हमेशा आसान नहीं होता। इसलिए निवेशक को सबसे पहले उस सेक्टर की लंबी अवधि की संभावनाओं को समझना चाहिए जिसमें कंपनी काम कर रही है।

उन्होंने हेल्थकेयर सेक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में नई एंटी-ओबेसिटी दवाओं को लेकर काफी चर्चा है, लेकिन इससे डायबिटीज, कैंसर, डायलिसिस और गंभीर बीमारियों की जरूरत खत्म नहीं हो जाती। ऐसे में आने वाले वर्षों में अस्पतालों, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग लगातार बनी रहने की संभावना है। यही लंबी अवधि की थीम किसी अच्छी कंपनी की ग्रोथ को आगे बढ़ाती है।

शेयर पहले ही कई गुना चढ़ चुका हो, तब भी मौका खत्म नहीं होता

सफीर आनंद के मुताबिक कई निवेशक सिर्फ इसलिए किसी स्टॉक से दूर हो जाते हैं क्योंकि वह पहले ही कई गुना चढ़ चुका होता है। लेकिन यह सोच हमेशा सही नहीं होती। अगर कंपनी अभी भी ऐसे सेक्टर में काम कर रही है, जहां आने वाले वर्षों में तेज ग्रोथ की संभावना है, तो शेयर आगे भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

उनका कहना है कि किसी शेयर ने पहले कितना रिटर्न दिया, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना यह समझना कि कंपनी का अगला ग्रोथ चरण कितना बड़ा हो सकता है। कई बार मजबूत कंपनियां लंबे समय तक ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार करती हैं और फिर भी निवेशकों के लिए शानदार वेल्थ क्रिएटर साबित होती हैं।

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‘Margin of Safety’ क्यों है जरूरी?

हालांकि क्वालिटी स्टॉक्स खरीदते समय जोखिम को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सफीर आनंद का कहना है कि हर निवेशक के पास ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ होना चाहिए। यानी यदि निवेश के बाद शेयर में कुछ समय के लिए गिरावट भी आ जाए, तो भी निवेशक का भरोसा कंपनी के बिजनेस पर बना रहना चाहिए।

इसी सोच के साथ बड़े संस्थागत निवेशक भी फैसले लेते हैं। वे केवल शेयर की कीमत नहीं देखते, बल्कि मैनेजमेंट की रणनीति, सेक्टर की मांग, विस्तार योजनाओं और भविष्य की कमाई का आकलन करते हैं। यही वजह है कि कई बार विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशक किसी स्टॉक में ऊंचे स्तर पर भी निवेश जारी रखते हैं।

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लंबी अवधि में बिजनेस जीतता है, कीमत नहीं

शेयर बाजार का इतिहास बताता है कि लंबी अवधि में वही कंपनियां सबसे ज्यादा वेल्थ बनाती हैं, जिनका बिजनेस लगातार बढ़ता रहता है। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे शेयर की कीमत के बजाय उसकी वैल्यू, बिजनेस मॉडल, इंडस्ट्री की संभावनाएं और मैनेजमेंट की गुणवत्ता को समझें। क्योंकि आखिरकार बाजार में रिटर्न शेयर की कीमत नहीं, बल्कि कंपनी की कमाई और उसके बिजनेस की मजबूती तय करती है।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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