stock-markett.online
अब देश भर के स्कूलों में शुरू होगी सेक्स एजुकेशन, केन्द्र सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी
अब देश भर के स्कूलों में शुरू होगी सेक्स एजुकेशन, केन्द्र सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी

अब देश भर के स्कूलों में शुरू होगी सेक्स एजुकेशन, केन्द्र सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी

सेक्स एजुकेशन देश के स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर देशभर के सभी स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक सेक्स एजुकेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद इन सिफारिशों को लागू किया जाएगा। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के सामने केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार ने समिति की रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कही ये बात

यह रिपोर्ट उस समय तैयार की गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसे उपायों पर विचार करे, जिनसे किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों और नाबालिग के गर्भवती होने के मामलों को पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत अपने-आप अपराध न माना जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया । इस समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह जांच करे कि पॉक्सो कानून का आपसी सहमति वाले किशोर रिश्तों पर क्या असर पड़ता है। साथ ही, यह भी देखा जाए कि बच्चों की सुरक्षा, उनकी निजता के अधिकार और कानून के प्रावधानों के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।

समिति ने क्या सिफारिशें की हैं?

इस विशेषज्ञ समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के विशेषज्ञ, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने सिफारिश की है कि स्कूलों के मुख्य पाठ्यक्रम में व्यापक यौन शिक्षा (सेक्स एजुकेशन) और बच्चों को यौन शोषण से बचाव के बारे में जागरूक करने वाले विषय शामिल किए जाएं।

समिति का यह भी कहना है कि छोटे बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार जरूरी जानकारी दी जानी चाहिए। शुरुआती कक्षाओं में उन्हें व्यक्तिगत स्वच्छता, शरीर की सही जानकारी और ‘गुड टच’ तथा ‘बैड टच’ जैसी महत्वपूर्ण बातें सिखाई जानी चाहिए। अपनी रिपोर्ट में समिति ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से इन सिफारिशों के आधार पर स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव करने की भी सलाह दी है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार स्कूलों और कॉलेजों में किशोर शिक्षा शुरू करने की सिफारिश भी की गई है।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *