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तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी कैदी ने मांगी खुद खाना बनाने की इजाजत, कोर्ट पहुंचा मामला
तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी कैदी ने मांगी खुद खाना बनाने की इजाजत, कोर्ट पहुंचा मामला

तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी कैदी ने मांगी खुद खाना बनाने की इजाजत, कोर्ट पहुंचा मामला

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक इन दिनों अपनी एक मांग को लेकर चर्चा में हैं। आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे वैनडाइक ने अदालत से अपील की है कि उन्हें अपना भोजन खुद तैयार करने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि जेल में मिलने वाला खाना उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के मुताबिक नहीं है। वैनडाइक ने कोर्ट से सेल में इंडक्शन कुकर और कुछ जरूरी रसोई सामान रखने की इजाजत मांगी है।

साथ ही उन्होंने कुछ विशेष खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है, जिसका खर्च उनका परिवार उठाने को तैयार है। उनकी इस याचिका ने जेल व्यवस्था, कैदियों के भोजन और व्यक्तिगत जरूरतों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

खाना छोड़ने से घटा 14 किलो वजन

वैनडाइक ने अपनी याचिका में मानवीय आधार पर बताया कि वह मई की शुरुआत से जेल का खाना लगभग नहीं खा पा रहे हैं। उनका कहना है कि भोजन में ज्यादा मसाले और तेल होने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है।

उन्होंने दावा किया कि खराब पोषण की वजह से उनका वजन करीब 14 किलोग्राम कम हो गया है और आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ा है। फिलहाल वह अधिकतर सोया मिल्क के सहारे रह रहे हैं। उन्होंने नियमित सोया मिल्क उपलब्ध कराने और मच्छरों से बचाव की सुविधा देने की मांग भी की है।

दिल्ली की अदालत इस मामले पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस याचिका पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है, जबकि जेल प्रशासन से अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

कैसा होता है तिहाड़ जेल का खाना?

तिहाड़ जेल में कैदियों के लिए भोजन एक तय व्यवस्था के तहत तैयार किया जाता है। जेल प्रशासन के अनुसार, यहां करीब 14 हजार से ज्यादा कैदियों के लिए डाइट प्लान तैयार किया गया है, जबकि रोहिणी और मंडोली जेल परिसरों में भी हजारों कैदियों को भोजन दिया जाता है।

आम तौर पर सुबह नाश्ते में चाय और ब्रेड दी जाती है। कुछ दिनों में पूरी-सब्जी या खिचड़ी भी विकल्प के तौर पर शामिल होती है। दोपहर और रात के भोजन में चार रोटी, दाल और सब्जी दी जाती है, जबकि चावल भी उपलब्ध कराया जाता है।

डाइट में तय मात्रा में मिलते हैं पोषक तत्व

जेल का भोजन एक निर्धारित राशन व्यवस्था के अनुसार तैयार होता है। इसमें अनाज, दाल, सब्जी, तेल, नमक और गुड़ की तय मात्रा शामिल होती है। अंडे या सोया उत्पाद सप्ताह में दो बार दिए जाते हैं और दूध भी इसी तरह उपलब्ध कराया जाता है।

गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों के साथ रह रही महिला कैदियों और स्वास्थ्य संबंधी जरूरत वाले कैदियों के लिए अलग डाइट का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार, भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट और जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाती है।

तिहाड़ का अपना फूड सिस्टम और बजट

तिहाड़ जेल में भोजन कैदियों की निगरानी वाली टीमों द्वारा तैयार किया जाता है, जिस पर डाइटिशियन नजर रखते हैं। जेल का सालाना भोजन बजट 600 करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है।

इसके अलावा तिहाड़ का अपना फूड ब्रांड भी है, जहां बेकरी उत्पाद, मसाले, तेल, अचार और स्नैक्स तैयार किए जाते हैं। जेल की कैंटीन में कैदी स्मार्ट कार्ड के जरिए बिस्किट और पैकेज्ड ड्रिंक जैसी अतिरिक्त चीजें खरीद सकते हैं।

दुनिया की जेलों में कैदियों को कैसा खाना मिलता है?

अलग-अलग देशों की जेलों में भोजन व्यवस्था काफी अलग है। अमेरिका के कुछ जेलों में नाश्ते में बरिटो, सीरियल और फल जैसे विकल्प मिलते हैं, जबकि रूस की हाई-सिक्योरिटी ब्लैक डॉल्फिन जेल में दलिया, ब्रेड, सूप और मांसाहारी भोजन दिया जाता है। चीन की कुछ जेलों में सुबह भाप में बनी ब्रेड, सब्जियां और बाद में चावल या नूडल्स परोसे जाते हैं।

अब यह फैसला दिल्ली की अदालत करेगी कि वैनडाइक को अपनी पसंद के अनुसार खाना बनाने की अनुमति मिलेगी या नहीं।

कौन है मैथ्यू आरोन वैनडाइक?

डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर से हथियारबंद समूहों तक का सफर

मैथ्यू आरोन वैनडाइक का जीवन काफी विवादों से भरा रहा है। वह अमेरिका के बाल्टीमोर में पले-बढ़े और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस से पढ़ाई की।

2011 में वह लीबिया डॉक्यूमेंट्री बनाने पहुंचे थे, लेकिन बाद में वहां मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ विद्रोही समूहों के साथ जुड़ गए। इस दौरान वह करीब छह महीने तक हिरासत में रहे और त्रिपोली के पतन के समय वहां से निकलने में सफल हुए।

भारत में NIA के आरोप क्या हैं?

बाद में वैनडाइक ने सीरिया समेत कई जगहों पर सशस्त्र समूहों को सलाह देने का दावा किया। उन्होंने Sons of Liberty International नाम की संस्था भी बनाई, जिसके बारे में उनका कहना है कि यह इराक, वेनेजुएला, फिलीपींस और यूक्रेन जैसे देशों में प्रशिक्षण देती है।

हालांकि भारतीय जांच एजेंसियों का आरोप अलग है। NIA के अनुसार, वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक म्यांमार से मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से भारत आए और उन्होंने म्यांमार की सैन्य सरकार का विरोध करने वाले समूहों को ड्रोन युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दी।

इसी मामले में उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप लगाए गए हैं और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

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