Mutual Fund NFO: म्यूचुअल फंड की नई स्कीम का 2026 में सूखा, बाजार की टेंशन या SEBI के नियम? क्यों थमी एनएफओ की रफ्तार
NFO 2026 : शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता, निवेशकों में इक्विटी को लेकर सतर्कता और मार्केट रेगुलेटर सेबी के सख्त नियमों का असर अब म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर भी साफ दिखने लगा है। साल 2026 के पहले 6 महीनों में न्यू फंड ऑफर (New Fund Offer) लॉन्च करने की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, खासतौर से इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम के मामले में। इस दौरान न सिर्फ नई स्कीम (Mutual Funds) लॉन्च होने के मामले कम हुए, बल्कि इनके जरिए जुटाया गया फंड भी कई साल के लो लेवल पर पहुंच गया। एक्टिव इक्विटी से लेकर डेट, हाइब्रिड और पैसिव फंड तक लगभग सभी कैटेगरी में यह रफ्तार धीमी रही।
जून में सिर्फ एक इक्विटी फंड
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में सिर्फ 7 नए ओपन-एंडेड फंड लॉन्च हुए, जिन्होंने कुल 460 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 310 करोड़ रुपये WhiteOak Capital Aggressive Hybrid Fund ने जुटाए, जबकि 3 इंडेक्स फंड ने मिलकर सिर्फ 48 करोड़ रुपये, 2 ETF ने 15 करोड़ रुपये और द वेल्थ कंपनी लार्ज एंड मिड कैप ने 87 करोड़ रुपये जुटाए।
इंडेक्स फंड में कोटक निफ्टी अल्फा लो वोलेटिलिटी 30 इंडेक्स फंड, ग्रो निफ्टी स्मॉल कैप 250 मोमेंटम क्वालिटी 100 इंडेक्स फंड और मोतीलाल ओसवाल बीएसई क्लीन एन्वायरमेंट इंडेक्स फंड शामिल हैं।
ETFs में आईसीआईसीआई प्रू निफ्टी स्मॉल कैप 250 ईटीएफ और ग्रोथ निफ्टी स्मॉल कैप 250 मोमेंटम क्वालिटी 100 ईटीएफ शामिल हैं। एग्रेसिव हाइब्रिड फंड में व्हाइटओक कैपिटल एग्रेसिव हाइब्रिड फंड शामिल है। जबकि इक्विटी कैटेगरी में सिर्फ द वेल्थ कंपनी लार्ज एंड मिड कैप फंड शामिल है।
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2026 : पहले 6 महीनों की कहानी
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले 3 महीनों (जनवरी-मार्च) में 56 नए म्यूचुअल फंड ऑफर (NFO) लॉन्च हुए। पहले 3 महीनों में NFO के जरिए करीब 10,650 करोड़ रुपये जुटाए गए। जनवरी में 12 एनएफओ, फरवरी में 21 एनएफओ और मार्च में 23 एनएफओ लॉन्च हुए थे।
अप्रैल में 13 एनएफओ बाजार में आए और 828 करोड़ रुपये जुटाए गए। मई में 13 एनएफओ लॉन्च हुए और इससे 471 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि जून में 7 नए ओपन-एंडेड फंड लॉन्च हुए, जिन्होंने कुल 460 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
इस तरह से छमाही के दौरान इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, पैसिव और फंड ऑफ फंड्स कैटेगरी में कुल 89 एनएफओ के जरिये जुटाई गई कुल रकम 13,040 करोड़ रुपये है, जो 10 साल का लो लेवल है।
AMC : मार्केट की अनिश्चितता पर अलर्ट
म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट का मानना है कि इक्विटी में निवेश का बेहतर विकल्प इक्विटी म्यूचुअल फंड है। लेकिन शायद निवेशकों की घबराहट के चलते म्यूचुअल फंड कंपनियों को फंड कलेक्शन को लेकर डर है या कंपनियां अलर्ट हैं।
पिछले साल तक की बात करें तो हर नया फंड ऑफर (NFO) एक मजबूत आईपीओ की तरह लगता था। तब एनएफओ कुछ ही घंटों में फुल सब्सक्राइब हो जाता था, लेकिन बीते महीने इस ट्रेंड में गिरावट का संकेत मिला था।
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SEBI के नए नियम भी वजह?
एक्सपर्ट का कहना है कि NFO की सुस्ती के पीछे सिर्फ कमजोर मार्केट सेंटीमेंट ही नहीं, बल्कि कई स्ट्रक्चरल फैक्टर भी हैं। शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसके अलावा, सेबी के सख्त नियमों के कारण सेक्टोरल और थीमैटिक फंड लॉन्च करना भी पहले के मुकाबले मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि अब नए NFO मुख्य रूप से पैसिव फंडों या नई AMC की ओर से आ रहे हैं।
पिछले 2 से 3 महीनों का ट्रेंड देखें तो निवेशकों ने थीमैटिक और सेक्टोरल फंड्स में ज्यादा इंटरेसट दिखाया। फरवरी और मार्च में सेक्टोरल और थीमैटिक म्यूचुअल फंड, इंडेक्स फंड्स, डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड्स, और ETFs में एक्टिव तरीके से एनएफओ लॉन्च देखे गए।
(Disclaimer: सभी म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। ET NOW स्वदेश अपने सभी पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं को सलाह देता है कि वे किसी भी पैसे और निवेश से संबंधित निर्णय लेने से पहले सभी योजना संबंधी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें और रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।)

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