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Large Cap Stocks in India: क्या लार्ज कैप के अच्छे दिन आने वाले हैं, FII की वापसी है किस बात का इशारा?
Large Cap Stocks in India: क्या लार्ज कैप के अच्छे दिन आने वाले हैं, FII की वापसी है किस बात का इशारा?

Large Cap Stocks in India: क्या लार्ज कैप के अच्छे दिन आने वाले हैं, FII की वापसी है किस बात का इशारा?

Large Cap Stocks in India: बीता एक साल भारत में लार्ज-कैप स्टॉक्स के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। लार्ज-कैप को रेफर करने वाले निफ्टी-50 के YTD रिटर्न (Nifty 50 Return) की बात करें, तो इसने बीते एक साल में -7.90% का निगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं इसके मुकाबले निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 9% की बढ़त दर्ज की गई। डेटा सेंटर जैसे नए निवेश विषयों और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने स्मॉल-कैप शेयरों के बेहतर प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लार्ज कैप में गिरावट के सबसे बड़े कारणों में ईरान-अमेरिका युद्ध के साथ-साथ कई घरेलू और वैश्विक स्थितियां शामिल रही हैं। इसके चलते भारत से विदेशी निवेशकों ने दूसरे मार्केट्स का रुख किया और कभी भरोसेमंद रिटर्न की गारंटी माने जाने वाले लार्ज-कैप स्टॉक्स ने निवेशकों को निराश करना शुरू कर दिया। हालांकि, यह तस्वीर अब पलट सकती है और आने वाले दिनों में लार्ज-कैप स्टॉक एक बार फिर से भरोसेमंद रिटर्न की गारंटी बन सकते हैं।

स्मॉल-कैप के मुकाबले लार्ज-कैप काफी सस्ते

अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के कारण तेजी देखने को मिली, वहीं भारतीय शेयर बाजार लगातार दस वर्षों की बढ़त के बाद इस वर्ष गिरावट में रहा। इस गिरावट का सबसे अधिक असर लार्ज-कैप शेयरों पर पड़ा। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, बड़ी कंपनियों के शेयर इस समय स्मॉल-कैप कंपनियों के मुकाबले लगभग 25% डिस्काउंट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में यह औसतन केवल 6% रहा है।

विदेशी निवेशकों की वापसी के मायने

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों (FII) की वापसी, बेहतर कमाई की संभावनाओं और आकर्षक वैल्यूएशन के चलते भारतीय लार्ज-कैप शेयर अब स्मॉल-कैप स्टॉक्स की तुलना में अपने कमजोर प्रदर्शन की भरपाई कर सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स, जेफरीज और सोसिएटे जेनरल जैसी ग्लोबल संस्थाओं का अनुमान है कि लार्ज-कैप शेयरों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि विदेशी निवेशक लगातार चौथे सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में नेट बायर बने हुए हैं। चूंकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बड़ी कंपनियों में अधिक होती है और हालिया गिरावट के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा बिकवाली भी इन्हीं शेयरों में की थी, इसलिए उनकी वापसी का सबसे अधिक फायदा लार्ज-कैप कंपनियों को मिलने की संभावना है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक के दो सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में करीब 1.5 अरब डॉलर के शेयर खरीदे। इससे पहले, जनवरी से मई के बीच उन्होंने इसी सेक्टर के 12 अरब डॉलर से अधिक के शेयर बेचे थे।

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बढ़ सकती है लार्ज कैप से कमाई

जेफरीज के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों ने प्रति शेयर आय (EPS) में तेज वृद्धि के कारण बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, अब बड़ी और छोटी कंपनियों की कमाई के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। जेफरीज के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान लार्ज-कैप कंपनियों की कमाई 14-15% प्रति वर्ष की दर से बढ़ सकती है, जबकि पिछले दो वर्षों में यह वृद्धि लगभग 8% थी।

किन शेयरों पर है गोल्डमैन की नजर?

गोल्डमैन सैक्स ने HDFC बैंक, एटरनल लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और इंटरग्लोब एविएशन को ऐसे लार्ज-कैप शेयरों में शामिल किया है, जिनका वैल्यूएशन आकर्षक है और जो विदेशी निवेशकों की वापसी से सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं। भारतीय लार्ज-कैप शेयरों की संभावित रिकवरी में बैंकिंग सेक्टर की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि निफ्टी 50 इंडेक्स में इसकी हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक है।

इनपुट- ब्लूमबर्ग

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