Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सर्च ऑपरेशन के दौरान IED ब्लास्ट, चार जवान शहीद
Last Updated on May 2, 2026 18:54, PM by Pawan
छत्तीसगढ़ से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। कांकेर–नारायणपुर सीमा क्षेत्र में डी‑माइनिंग अभियान के दौरान हुए IED विस्फोट में डीआरजी के चार जवान शहीद हो गए। बता दें कि, छत्तीसगढ़ के कांकेर में डीमाइनिंग ऑपरेशन करते समय नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी विस्फोट में छत्तीसगढ़ पुलिस के डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के चार जवान घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान सभी जवानों की मौत हो गई।
IED ब्लास्ट में घायल हुए थे जवान
एक अधिकारी के अनुसार, यह धमाका नारायणपुर जिले से लगे जंगल वाले इलाके में हुआ। वहां पुलिस टीम नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी को खोजने और निष्क्रिय करने के लिए अभियान चला रही थी। विस्फोटक डिवाइस की चपेट में आने से चार जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इनमें इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और कांस्टेबल संजय गढ़पाले ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। चौथे जवान कांस्टेबल परमानंद कोर्राम को एयरलिफ्ट करके रायपुर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान वो भी शहीद हो गए।
37 जिलों पप अब भी सरकार की नजर
बचा दें कि, 31 मार्च को राज्य को नक्सल हिंसा से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यह नक्सलियों से जुड़ी पहली बड़ी हिंसक घटना मानी जा रही है। भारत को अब नक्सल हिंसा यानी वामपंथी उग्रवाद से मुक्त घोषित कर दिया गया है। इसके बाद केंद्र सरकार ने पहले नक्सल प्रभावित रहे इलाकों को नई निगरानी श्रेणियों में बांटने का फैसला किया है। 8 अप्रैल को नौ राज्यों को भेजे गए सरकारी संदेश में कहा गया कि 2015 से लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों के कारण अब देश का कोई भी जिला नक्सल प्रभावित श्रेणी में नहीं आता। सरकार ने 37 जिलों को अब प्राथमिकता वाले श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में फिलहाल नक्सली हिंसा का बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों पर लगातार नजर रखना अभी भी जरूरी माना जा रहा है।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले को “चिंता वाला जिला” श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां नक्सली नेटवर्क पहले की तुलना में कमजोर हुआ है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। ये कुल 38 जिले आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में फैले हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह नया वर्गीकरण इस बात को दिखाता है कि अब फोकस सीधे संघर्ष वाले इलाकों से हटकर उन क्षेत्रों पर किया जा रहा है, जहां लगातार निगरानी और विकास कार्यों को मजबूत करने की जरूरत है।
