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Vijay Kedia Quotes: FD या शेयर बाजार, कहां बनेगी ज्यादा दौलत? विजय केडिया ने बताया कंपाउंडिंग का मंत्र
Vijay Kedia Quotes: FD या शेयर बाजार, कहां बनेगी ज्यादा दौलत? विजय केडिया ने बताया कंपाउंडिंग का मंत्र

Vijay Kedia Quotes: FD या शेयर बाजार, कहां बनेगी ज्यादा दौलत? विजय केडिया ने बताया कंपाउंडिंग का मंत्र

Vijay Kedia Quotes: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने वेल्थ क्रिएशन को लेकर आम निवेशकों के लिए एक बेहद सटीक और व्यावहारिक संदेश साझा किया है। केडिया का मानना है कि पावर ऑफ कंपाउंडिंग पर सिर्फ प्रोफेशनल्स का ही अधिकार नहीं है, बल्कि यह हर उस अनुशासित नागरिक को मिलना चाहिए जो लॉन्ग टर्म की सोच रखता है। इसलिए उन्होंने कहा है- “not everyone can analyse stocks. But everyone deserves the opportunity to benefit from the power of compounding.”। उन्होंने समझाया कि जिस तरह हर व्यक्ति खुद विमान उड़ाने में सक्षम नहीं हो सकता लेकिन हवाई सफर करने का हक हर नागरिक के पास है। ठीक उसी तरह हर आम निवेशक के लिए बैलेंस शीट या स्टॉक्स का तकनीकी विश्लेषण करना जरूरी नहीं है, मगर कंपाउंडिंग के जरिए वेल्थ बनाने का अवसर हर किसी को मिलना चाहिए।पारंपरिक बचत की सीमाओं और इक्विटी ओनरशिप के महत्व को रेखांकित करते हुए विजय केडिया ने स्पष्ट किया कि कोई भी देश सिर्फ पैसे बचाने से समृद्ध नहीं बनता, बल्कि वास्तविक समृद्धि तब आती है जब नागरिक संपत्ति पैदा करने वाले व्यवसायों में हिस्सेदारी खरीदते हैं। सीधे शेयरों में ट्रेडिंग करना भले ही हर व्यक्ति के स्वभाव या समझ के अनुकूल न हो, लेकिन देश की आर्थिक वृद्धि में भागीदार बनकर कंपाउंडिंग का फल पाना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने एक सीधे गणितीय उदाहरण के जरिए दिखाया कि 20 वर्षों की अवधि में रिटर्न का एक छोटा सा अंतर अंतिम पूंजी में कितना विशाल फासला खड़ा कर देता है।10,000 रुपये की मंथली सेविंग: FD या इक्विटी में 35 लाख रुपये का अंतरविजय केडिया ने एक आम निवेशक की बचत का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर कोई व्यक्ति 20 साल तक हर महीने 10,000 रुपये का अनुशासित निवेश करता है, तो दो अलग-अलग विकल्पों में मिलने वाला परिणाम चौंकाने वाला होता है-1- अगर टैक्स चुकाने के बाद एफडी में सालाना रिटर्न 5 फीसदी मिलता है, तो 20 साल के बाद कुल फंड लगभग 41 लाख रुपये बनता है।2- अगर इक्विटी के जरिए पोस्ट-टैक्स रिटर्न 10 फीसदी हासिल होता है, तो वही 10,000 रुपये का मंथली निवेश बढ़कर लगभग 76 लाख रुपये हो जाता है।केडिया के अनुसार, 5 फीसदी और 10 फीसदी के बीच का अंतर आम नजरिये से सिर्फ 5 फीसदी दिखता है, लेकिन हकीकत में यह अंतर 41 लाख रुपये और 76 लाख रुपये के बीच का है। वही शख्स, समान 10,000 रुपये की मासिक रकम, वही अनुशासन और पूरे 20 साल का समय – फिर भी अंतिम पूंजी में सीधा 35 लाख रुपये का भारी फासला बन जाता है।(Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।)

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