Currency Check : 25 पैसे गिरकर 95.19 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ रुपया, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल
Currency Check : सोमवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 25 पैसे गिरकर 95.19 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछली बार यह 94.94 रुपए के लेवल पर बंद हुआ था। आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने और विदेशी पूंजी की निकासी के चलते रुपया लगातार तीसरे सत्र में कमजोर हुआ है। आयातकों द्वारा डॉलर की खरीद, तेल की कीमतों में उछाल और फेड (Fed) के फैसले से पहले विदेशी पूंजी की निकासी के असर से रुपया लगातार तीसरे सत्र में फिसला है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च राजीव शरण का कहना है कि सोमवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में रुपये में गिरावट आई और यह फिर से 95 के स्तर की ओर खिसकने लगा। रुपए पर बाहरी कारणो का असर फिर से दिखने लगा है। वीकेंड के दौरान स्थिति में यह बदलाव आया है कि बाजार का फोकस केंद्रीय बैंक के नियमों से हटकर पूरी तरह से तेल की कीमतों केंद्रित हो गया है। इस महीने की शुरुआत में RBI के बड़े हस्तक्षेप ने सट्टेबाजों को अपनी ‘शॉर्ट पोजीशन’ से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन यह ब्रेंट क्रूड के 114 अमेरिकी डॉलर के आसपास बने रहने की वास्तविकता को नहीं बदल सकता।
यह अंतर इसलिए अहम है क्योंकि, भले ही भारत की मुद्रा व्यवस्था सुरक्षित है, लेकिन इसका आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। फिलहाल, RBI के सोचे-समझे कदम और उसके पास मौजूद भारी विदेशी मुद्रा भंडार (जो दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक है और लगभग 11 महीने के आयात को कवर कर सकता है) उसे रुपये की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पर्याप्त गुंजाइश देते हैं। निकट भविष्य में, तेल की कीमतें और विदेशी निवेश का फ्लो फिर से रफ्तार पकड़ पाता है या नहीं, ये दो मुख्य फैक्टर यह तय करेंगे कि आगे क्या होगा।
HDFC सिक्योरिटीज में रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि एशियाई मुद्राओं में कमजोरी और घरेलू बॉन्ड यील्ड में मजबूती के कारण, भारतीय रुपया लगातार तीसरे सत्र में भी गिरावट के साथ बंद हुआ। इस हफ्ते तीन बड़े केंद्रीय बैंकों के फैसले आने वाले हैं, ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) के बने रहने की संभावना है। निकट अवधि में, स्पॉट USDINR के लिए 95.80 का स्तर एक ऊपरी सीमा (कैप) की तरह है, जबकि 94.95 का स्तर एक अहम सपोर्ट बना हुआ है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रुपये के मूल्य में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए कदम उठा रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक मुद्रा का मूल्य तय नहीं करता है।
तिरुचिरापल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए, सीतारमण ने कहा कि RBI के प्रयासों का मकसद रुपये की विनिमय दर (exchange rate) को तय करना नहीं, बल्कि उसमें होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव को रोकना है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके असर (खासकर आयात लागत और महंगाई) को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
देश की वित्तीय स्थिति पर सीतारमण ने कहा कि भारत का राजकोषीय घाटा साल-दर-साल कम हो रहा है, और सरकार 2030 तक कर्ज-जीडीपी अनुपात को घटाकर 50 प्रतिशत पर लाने की दिशा में काम कर रही है।
देश के कर्ज के स्तर को लेकर जताई जा रही चिंताओं को स्वीकार करते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसी चिंताएं जायज हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कर्ज का बोझ लगातार कम हो रहा है।
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