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Tata Sons vs Tata Trusts: टाटा सन्स में संकट और गहराया, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को नोएल टाटा ने दी चुनौती
Tata Sons vs Tata Trusts: टाटा सन्स में संकट और गहराया, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को नोएल टाटा ने दी चुनौती

Tata Sons vs Tata Trusts: टाटा सन्स में संकट और गहराया, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को नोएल टाटा ने दी चुनौती

Tata Sons vs Tata Trusts: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में शीर्ष नेतृत्व को लेकर खींचतान एक बार फिर तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। उन्होंने 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में पारित प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही बैठक की बिना एडिट की गई वीडियो रिकॉर्डिंग भी मांगी है। इस नए घटनाक्रम से टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच जारी मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं।

नोएल टाटा ने क्यों दी नियुक्ति को चुनौती?

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 के बाद अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। नोएल टाटा का कहना है कि 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक के एजेंडे में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव शामिल नहीं था। बैठक में केवल नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी से जुड़ी जानकारी पर चर्चा होनी थी। इसके बावजूद नियुक्ति का प्रस्ताव पेश किया गया। उनका तर्क है कि जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने के कारण यह प्रस्ताव वैध नहीं है।

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बोर्ड में किसने किया समर्थन और किसने विरोध?

17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव का चार डायरेक्टरों ने समर्थन किया था। इनमें वेणु श्रीनिवासन, अनीता जॉर्ज, हरीश मनवानी और सौरभ अग्रवाल शामिल थे। वहीं, नोएल टाटा ने इसका विरोध किया था। नोएल टाटा का दावा है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक, ऐसे फैसलों के लिए टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित डायरेक्टरों का जरूरी समर्थन होना चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं हुआ।

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टाटा ट्रस्ट्स की कितनी हिस्सेदारी?

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा संस समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसके जरिए टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखी जाती है। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। सितंबर में बोर्ड ने उन्हें अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद सामने आए हैं।

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क्यों अहम है यह विवाद?

यह विवाद केवल टाटा संस के चेयरमैन की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इससे यह सवाल भी जुड़ा है कि समूह की होल्डिंग कंपनी में बड़े फैसले लेने के दौरान टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और अधिकार कितने महत्वपूर्ण हैं। टाटा संस के जरिए टाटा ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखी जाती है। इनमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा पावर जैसी कंपनियां शामिल हैं। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता बने रहने से समूह के फैसलों और कारोबारी रणनीति पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। हालांकि, इस विवाद का सूचीबद्ध कंपनियों के कामकाज पर तत्काल कोई सीधा असर होने की पुष्टि नहीं हुई है।

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