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Adani US Court Case: अडानी मामले में अमेरिकी जज ने DOJ से मांगी और जानकारी, केस वापस लेने पर उठाए दो सवाल
Adani US Court Case: अडानी मामले में अमेरिकी जज ने DOJ से मांगी और जानकारी, केस वापस लेने पर उठाए दो सवाल

Adani US Court Case: अडानी मामले में अमेरिकी जज ने DOJ से मांगी और जानकारी, केस वापस लेने पर उठाए दो सवाल

Adani US Court Case: अमेरिकी अदालत ने उद्योगपति गौतम अडाणी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले (Gautam Adani Bribery Case) को खत्म करने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग (Justice Department या DOJ) की ओर से उठाए गए कदम पर और जानकारी मांगी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार देर रात न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत (डिस्ट्रिक्ट कोर्ट) के जज निकोलस गैराफिस ने एक संक्षिप्त आदेश जारी करते हुए अडाणी को 15 जुलाई तक हलफनामे के साथ दो सवालों के लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने पूछे ये दो सवाल

सुनवाई के दौरान जज ने अडाणी से दो अहम सवालों के जवाब मांगे:

  1. क्या आपको इस बात की जानकारी है कि आरोपपत्र (इंडिक्टमेंट) खारिज कराने के संबंध में किसी ने कोई वादा किया, प्रस्ताव दिया, मांगा, प्राप्त किया या किसी तरह की सहमति जताई है?
  2. क्या आपको आरोपपत्र वापस लेने के बदले किसी प्रकार के लेन-देन या समझौते की जानकारी है?

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अडाणी के वकील का टिप्पणी से इनकार

अडाणी के वकील रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इससे पहले उन्होंने अदालत से मामला खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि इसमें “कानूनी और तथ्यात्मक कमियां” हैं।

जज ने पहले भी मांगा था स्पष्टीकरण

आमतौर पर अमेरिका में संघीय अभियोजकों को आपराधिक मामले वापस लेने का व्यापक अधिकार होता है और अदालत के पास उन्हें रोकने की सीमित शक्ति होती है। अमेरिकी न्याय विभाग ने मई में कहा था कि उसने इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, जून में जज गैराफिस ने विभाग से अतिरिक्त जानकारी मांगी थी। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन यह स्पष्ट करने में विफल रहा कि मामले को वापस लेना क्यों उचित है।

न्याय विभाग ने क्या कहा?

इसके जवाब में अमेरिकी न्याय विभाग के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककॉटटर ने 4 जुलाई को दाखिल दस्तावेज में कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के अंतिम सप्ताहों में अडाणी के खिलाफ सिक्योरिटीज से जुड़े आरोप लगाए ही नहीं जाने चाहिए थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह एक विदेशी मामला था, जिसमें सबूत जुटाने से जुड़ी असाधारण कठिनाइयां थीं और संबंधित प्रतिभूतियों में निवेशकों का कोई वित्तीय नुकसान भी नहीं हुआ था।

क्या है मामला?

साल 2024 के अंत में अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अडाणी और अन्य लोगों पर भारत में सोलर एनर्जी परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर (250 मिलियन डॉलर) से अधिक की रिश्वत देने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। हालांकि, अडाणी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

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