क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल तो अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से आया है। लेकिन, ऑयल मार्केट में इस उछाल को भुनाने की कोशिशें पिछले छह हफ्तों से जारी हैं। ईरान से जुड़े बड़े जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट से ठीक पहले एक के बाद कई बेयरिश बेट देखने को मिले हैं। इन ट्रेड्स की कुल वैल्यू 3.1 अरब डॉलर से ज्यादा की है। आखिर ये बेट्स कौन लगा रहा है?
कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन ने इन ट्रेड्स की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे मामले में ट्रेड्स की पोजीशन और उसकी टाइमिंग चौंकाने वाले हैं। ऐसा लगता है कि हर ट्रेड कीमतों में उछाल लाने वाली बड़ी खबरे से पहले किया गया। इनमें अमेरिकी मिलिट्री की पोजीशन में बदलाव, सीजफायर के संकेत या डील की बातचीत से जुड़ी खबरें शामिल हैं। बीते कुछ हफ्तों में इन खबरों का क्रूड ऑयल की कीमतों पर बड़ा असर देखने को मिला है।
सबसे ताजा मामला 6 मई का है। उस दिन अमेरिका-ईरान के बीच संभावित डील की Axios की खबर से ठीक एक घंटे पहले करीब 92 करोड़ डॉलर के मंदी के सौदे (Short Position) किए गए। एक्सियोस की खबर के बाद क्रूड की कीमतों में गिरावट आई। इससे यह संकेत मिलता है कि मंदी के सौदे करने वालों को इस बारे में पता था। मार्च और अप्रैल में भी इस तरह के सौदे किए गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले में पूर्वनियोजित देरी से कुछ मिनट्स पहले, सीजफायर की खबरों से कुछ घटे पहले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने की खबर से ठीक पहले मंदी के सौदे किए गए। खास बात यह है कि हर सौदा मंदी का था, जो अचानक आई जियोपॉलिटिकल खबर का फायदा उठाने के मकसद से किया गया। फिर उन खबरों पर ऑयल की कीमतों पर बड़ा असर देखा गया।
किसी एसेट की कीमतों की संभावित दिशा के अनुमान पर तेजी या मंदी के सौदे होना कोई असमान्य बात नहीं है। लेकिन, पिछले छह हफ्तों में क्रूड की कीमतों पर जिस तरह से दांव लगाया है, उन सभी ट्रेड्स में एक खास तरह की समानता दिखती है। इस समानता की अनदेखी नहीं की जा सकती। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, रेगुलेटर्स अब सीएमई ग्रुप और इंटरनेशनल एक्सचेंज जैसे बड़े ठिकानों में बड़ी ट्रेडिंग एक्टिविटी की जांच कर रहे हैं।
रेगुलेटर्स इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या ये पोजीशन कीमतों की संभावित दिशा का सामान्य फायदा उठाने के लिए बनाई गई या पोजीशन लेने वाले ट्रेडर्स के पास कुछ ऐसी जानकारियां थीं, जो सार्जनिक यानी पब्लिक नहीं थीं। ऐसे सौदों पर अमेरिका में कड़ी प्रतिक्रिया देखने मिली हैं। अमेरिकी सांसद रिची टोरेस ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और CFTC दोनों से मामले की जांच करने की अपील की है।

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