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Dixon Tech Share Price: Vivo संग JV पर सरकार से ग्रीन सिग्नल, ब्रोकरेज ने बढ़ाए टारगेट; शेयर में दिखी 4% तक तेजी
Dixon Tech Share Price: Vivo संग JV पर सरकार से ग्रीन सिग्नल, ब्रोकरेज ने बढ़ाए टारगेट; शेयर में दिखी 4% तक तेजी

Dixon Tech Share Price: Vivo संग JV पर सरकार से ग्रीन सिग्नल, ब्रोकरेज ने बढ़ाए टारगेट; शेयर में दिखी 4% तक तेजी

शुक्रवार, 10 जुलाई को डिक्सन टेक्नोलोजिज (इंडिया) लिमिटेड के शेयरों में दिन में 4% तक की बढ़त देखी गई। BSE पर शेयर 14,026.70 रुपये के हाई तक गया। हालांकि बाद में इसने अपनी बढ़त गंवा दी। कंपनी को वीवो इंडिया के साथ अपने जॉइंट वेंचर (JV) के लिए ‘प्रेस नोट 3’ के तहत सरकारी मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी का लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा था। यह JV अभी इनकॉरपोरेट नहीं हुआ है। इसमें डिक्सन की 51% और वीवो की 49% हिस्सेदारी होगी।

यह भारत में स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के लिए ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) का काम करेगा। यह वेंचर ₹5 करोड़ की शुरुआती पेड-अप कैपिटल के साथ शुरू होगा। भारत के स्मार्टफोन मार्केट में वीवो की मजबूत स्थिति को देखते हुए, इस डेवलपमेंट को डिक्सन के लिए एक रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। Dixon Tech इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज देती है।

वीवो भारत में हर साल लगभग 3.5 करोड़ स्मार्टफोन बेचती है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में डिक्सन लगभग 60 लाख वीवो डिवाइस बनाएगी। वित्त वर्ष 2028 में यह संख्या बढ़कर 2 करोड़ यूनिट हो जाएगी। वीवो के प्रोडक्ट्स से होने वाली कमाई डिक्सन के मौजूदा स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग से कमाई की तुलना में 20-30% ज्यादा होगी, जिससे मार्जिन को सपोर्ट मिल सकता है।

Dixon Tech को JV से कितने रेवेन्यू की उम्मीद

डिक्सन टेक ने इस JV से लगभग ₹30,000 करोड़ का रेवेन्यू आने का अनुमान जताया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब 60 से 90 दिनों के अंदर कामकाज शुरू होने की उम्मीद है। इसमा मतलब हुआ कि अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही से इस JV का काम शुरू हो सकता है। डिक्सन ने वित्त वर्ष 2026 में लगभग 3.3 करोड़ स्मार्टफोन बनाए थे।

ब्रोकरेजेज की राय

ब्रोकरेज हाउस इस मंजूरी को लेकर सकारात्मक हैं। इक्विरस को उम्मीद है कि यह JV वित्त वर्ष 2027 में डिक्सन टेक की मैन्युफैक्चरिंग में 80 लाख-1 करोड़ स्मार्टफोन का इजाफा करेगा। ब्रोकरेज इसे कंपनी की ग्रोथ के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक मानती है। जेपी मॉर्गन ने डिक्सन टेक के शेयर के लिए अपना प्राइस टारगेट ₹14,300 से बढ़ाकर ₹16,700 प्रति शेयर कर दिया है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि JV के जरिए मोबाइल वॉल्यूम वित्त वर्ष 2027 में 1.1 करोड़ यूनिट और वित्त वर्ष 2028 में 2.2 करोड़ यूनिट होगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में डिक्सन की कुल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग 4.3-4.4 करोड़ यूनिट और वित्त वर्ष 2028 में 5.8 करोड़ यूनिट रहेगी।

UBS ने स्टॉक पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और ₹13,700 का प्राइस टारगेट दिया है। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि इस JV से वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के दौरान Dixon की कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। UBS के अनुसार, Vivo ने कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 3.2 करोड़ स्मार्टफोन बेचे। इस वॉल्यूम का लगभग दो-तिहाई हिस्सा जॉइंट वेंचर में शिफ्ट होने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि संभावित मासिक प्रोडक्शन वॉल्यूम लगभग 17.5 करोड़ यूनिट होगा।

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मोतीलाल ओसवाल का क्या है कहना

Motilal Oswal ने डिक्सन टेक के शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और प्राइस टारगेट बढ़ाकर ₹16,100 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि Vivo के साथ JV से Dixon की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और भारत के Android स्मार्टफोन सेगमेंट में उसकी मार्केट पोजिशन बेहतर होगी। फिलहाल भारत के स्मार्टफोन मार्केट में Vivo की हिस्सेदारी लगभग 23% है। Dixon को उम्मीद है कि Vivo के प्रोडक्शन वॉल्यूम का लगभग 67% हिस्सा जॉइंट वेंचर के जरिए मैन्युफैक्चर किया जाएगा। ब्रोकरेज का यह भी मानना ​​है कि PLI 2.0 स्कीम से जुड़ी कोई भी घोषणा एक अतिरिक्त पॉजिटिव ट्रिगर का काम कर सकती है।

हालांकि, फिलिप कैपिटल ने शेयर पर अपनी ‘सेल’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि JV का असर पहले ही कंपनी के रेवेन्यू और EBITDA अनुमानों में शामिल किया जा चुका है। डिक्सन टेक का शेयर 3 महीनों में 25 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप इस वक्त 82000 करोड़ रुपये है।

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