Gold Investment: 5 लाख गोल्ड में लगाने हैं? पहले जानें फिजिकल गोल्ड, ETF और गोल्ड फंड में रिटर्न, रिस्क, लिक्विडिटी का फर्क
अगर आपके पास 5 लाख रुपए हैं और आप उसे गोल्ड में लगाना चाहते हैं, तो सबसे पहला सवाल यह नहीं है कि कितना निवेश करें, बल्कि यह है कि किस फॉर्म में करें। गोल्ड जूलरी, फिजिकल बार-सिक्के, गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड, हर ऑप्शनअपने-अपने में बहुत अलग है। सही चुनाव इस बात पर डिपेंड करता है कि आपको गोल्ड से क्या चाहिए; सिर्फ प्राइस ग्रोथ, आसान लिक्विडिटी, फिजिकल पजेशन या लंबी अवधि की होल्डिंग। आइए हर ऑप्शन को सिंपल तरीके से समझते हैं।
फिजिकल गोल्ड: हाथ में है, पर कॉस्ट भी साथ आती हैं
गोल्ड बार या सिक्के खरीदने पर आपका सीधा मालिकाना हक होता है, डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती, और आप इसे परिवार को गिफ्ट या ट्रांसफर भी कर सकते हैं। लेकिन मेकिंग चार्ज और प्रीमियम की वजह से खरीद की कॉस्ट बढ़ जाती है, स्टोरेज और सिक्योरिटी की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ती है, और बेचते समय मिलने वाला दाम मार्केट प्राइस से कम भी हो सकता है। जूलरी तो निवेश के लिहाज से और भी कम असरदार मानी जाती है क्योंकि मेकिंग चार्ज यहां सबसे ज्यादा होता है। 5 लाख जैसी रकम में अगर बड़ा हिस्सा फिजिकल गोल्ड में जाता है, तो स्टोरेज और रीसेल की प्लानिंग भी साथ में करनी पड़ेगी।
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गोल्ड ETF: बिना स्टोरेज के गोल्ड एक्सपोजर
गोल्ड ETF शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और घरेलू गोल्ड प्राइस को ट्रैक करते हैं। इसमें फिजिकल स्टोरेज की टेंशन नहीं रहती, डीमैट अकाउंट से आसानी से खरीद-बिक्री हो जाती है और प्राइसिंग भी पूरी तरह ट्रांसपेरेंट रहती है। हालांकि इसमें एक्सपेंस रेशियो, ब्रोकरेज और डीमैट से जुड़े चार्ज जैसे कॉस्ट भी ध्यान में रखने होते हैं। जो निवेशक सिर्फ गोल्ड प्राइस से जुड़ा रिटर्न चाहते हैं, फिजिकल पजेशन नहीं, उनके लिए ETF एक अच्छा रास्ता हो सकता है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड
गोल्ड म्यूचुअल फंड के जरिए भी गोल्ड में निवेश किया जा सकता है। इसमें आपको सोना खरीदकर रखने की जरूरत नहीं होती। इसमें SIP की सुविधा भी मिल सकती है, यानी पूरे 5 लाख रुपए एक साथ लगाने के बजाय आप थोड़ा-थोड़ा पैसा निवेश कर सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले फंड का खर्च, वह किस ETF में पैसा लगाता है और टैक्स जरूर देख लें।
निवेश से पहले 5 बातें जरूर चेक करें
- पहला, गोल क्लियर करें- डाइवर्सिफिकेशन चाहिए, वेल्थ प्रिजर्वेशन या फिजिकल गोल्ड।
- दूसरा, इन्वेस्टमेंट होराइजन तय करें, क्योंकि शॉर्ट और लॉन्ग टर्म में गोल्ड अलग व्यवहार करता है।
- तीसरा, प्रीमियम, मेकिंग चार्ज, एक्सपेंस रेशियो और ट्रांजैक्शन कॉस्ट को आपस में कंपेयर करें।
- चौथा, लिक्विडिटी देखें कि एग्जिट कितनी आसानी से और किस दाम पर हो पाएगा।
- पांचवां, टैक्सेशन जरूर जान लें, क्योंकि यह प्रोडक्ट के साथ-साथ खरीद की तारीख और तरीके पर भी डिपेंड करता है।
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कुल मिलाकर, 5 लाख के लिए भी कोई एक बेस्ट गोल्ड प्रोडक्ट नहीं है। फैसला इस पर टिका है कि आप गोल्ड क्यों खरीद रहे हैं, कितने समय के लिए होल्ड करना चाहते हैं और क्या फिजिकल पजेशन आपके लिए जरूरी है।

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