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India-Pakistan Relations: ‘बातचीत का दरवाजा खुला रहना चाहिए’; पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर RSS का बड़ा बयान
India-Pakistan Relations: ‘बातचीत का दरवाजा खुला रहना चाहिए’; पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर RSS का बड़ा बयान

India-Pakistan Relations: ‘बातचीत का दरवाजा खुला रहना चाहिए’; पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर RSS का बड़ा बयान

India-Pakistan Relations: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार (13 मई) को कहा कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है। उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ संवाद के लिए हमेशा रास्ता खुला रहना चाहिए। आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है। अब समय आ गया है कि नागरिक समाज नेतृत्व करे।

उन्होंने कहा, “किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना आवश्यक है। मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही हमें अपने दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा उनसे संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए।” RSS के सरकार्यवाह ने दोनों देशों के बीच गतिरोध को तोड़ने में लोगों के बीच आपसी संपर्क को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इसे अब और अधिक से अधिक आजमाया जाना चाहिए।

हालांकि, सरकार पारंपरिक राजनयिक चैनलों से इतर ‘ट्रैक टू’ कूटनीति पर चुप्पी साधे हुए है। लेकिन विपक्षी नेताओं सहित कई बुद्धिजीवियों ने लंबे समय से नागरिक समाज की भागीदारी की वकालत की है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यही एक उम्मीद है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंततः नागरिक समाज के रिश्ते ही काम आएंगे। क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम कभी एक राष्ट्र रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इसलिए, इस पर जोर देना होगा।” उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और उसके आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने के रवैये से कैसे निपटना चाहिए। इस पर उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, “देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है। लेकिन पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी उकसावे वाली हरकतें करता रहता है।”

होसबाले ने आगे कहा कि व्यापार और वाणिज्य, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए क्योंकि संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रहनी चाहिए। होसबाले ने कहा कि इसी वजह से कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखा गया है। उन्होंने कहा कि वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सामुदायिक नेताओं को आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति कुछ दूरी और नकारात्मकता विकसित हो गई है।

‘ईरान युद्ध तेल की वजह से हो रहा’

दत्तात्रेय होसबाले ने इंटरव्यू के दौरान मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहा युद्ध सभ्यतागत संघर्ष नहीं है। बल्कि इसकी वजह तेल है। उन्होंने कहा कि भारत राष्ट्रों और नेताओं की सद्बुद्धि जगाने में भूमिका निभा सकता है। होसबाले ने कहा कि युद्ध आम तौर पर दुष्ट मानसिकता या राष्ट्रों या व्यक्तियों के लालच एवं अहंकार का परिणाम होते हैं। जब होसबाले से पूछा गया कि क्या उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर है, तो उन्होंने न में जवाब दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का हमला परमाणु हथियारों को लेकर है या फिर किसी सभ्यता को नष्ट करने के लिए है, जैसा कि ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में धमकी दी थी, तो इसपर होसबाले ने कहा, “युद्ध, लड़ाइयां, झड़पें और संघर्ष विश्व के संपूर्ण इतिहास में दुनिया के हर हिस्से में हमेशा से होते रहे हैं।” उन्होंने कहा, “युद्ध आमतौर पर मन में जन्म लेते हैं। जब मैं स्कूल में था, तब ‘युद्ध बुरी चीज है’ शीर्षक वाला एक पाठ था। वह बुरी चीज एक दुष्ट मानसिकता के कारण पैदा होती है।”

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होसबाले ने कहा, “जब आप किसी ऐसी चीज पर कब्जा करना चाहते हैं, जो आपकी नहीं है, या आप बहुत लालची हो जाते हैं, या किसी राष्ट्र, समाज या नेतृत्व में ऐसी कोई प्रवृत्ति विकसित हो जाती है, तो युद्ध छिड़ जाते हैं।” उन्होंने कहा कि यह भले ही तेल के लिए युद्ध है। लेकिन पहले ही भविष्यवाणी की जा चुकी है कि अगला संघर्ष पानी को लेकर हो सकता है। आरएसएस में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले होसबाले ने कहा कि प्रख्यात विचारक डॉ. सैमुअल हंटिंगटन ने सभ्यताओं के बीच युद्ध की भविष्यवाणी की थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह (ईरान युद्ध) वैसा युद्ध नहीं है।

पीएम मोदी की अपील पर क्या बोले?

होसबाले ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर भारत राष्ट्रों और नेताओं की सद्बुद्धि को जगाने में भूमिका निभा सकता है। खर्चों में कटौती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का समर्थन करते हुए आरएसएस महासचिव ने कहा कि यह देश के हित में है। उन्होंने कहा कि युद्ध न होने पर भी सादगी और मितव्ययिता भारतीय जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। होसबाले ने कहा, “यह वह बुनियादी चीज है, जिसका हमें पालन और अभ्यास करना चाहिए। संकट और चुनौतियों के समय में इसे आत्मसात करना और अमल में लाना जरूरी है।”

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