Mutual Funds Favourite Stocks : विदेशी निवेशकों को ही नहीं, म्यूचुअल फंड के भी फेवरेट हैं ये 5 शेयर, मजबूत बनी है होल्डिंग्स
Mutual Funds Favourite Stocks: भारतीय शेयर बाजार में किसी कंपनी की शेयरहोल्डिंग का पैटर्न उसके प्रति संस्थागत निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत माना जाता है। जब किसी कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) और घरेलू म्यूचुअल फंड (Mutual Fund Holding) दोनों लगातार अपनी हिस्सेदारी बनाए रखें या बढ़ाएं, तो इसे कंपनी के मजबूत फंडामेंटल और लंबी अवधि की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों पर नजर डालें तो Sona BLW Precision Forgings, Axis Bank, RBL Bank, Shriram Finance और HDFC Bank जैसे बड़े नाम ऐसे शेयरों में शामिल हैं, जहां म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है। इन कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मौजूदगी भी लगातार बढ़ी है, जो इनके प्रति घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
Sona BLW Precision
ऑटो कंपोनेंट और ईवी सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनी Sona BLW Precision Forgings में म्यूचुअल फंड लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। सितंबर 2023 में जहां म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 23.14% थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 35.10% पहुंच गई। इसी दौरान DII की हिस्सेदारी भी 27.5% से बढ़कर 41.5% हो गई।
हालांकि FII की हिस्सेदारी इस अवधि में घटकर 23.7% रह गई है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की बढ़ती खरीदारी ने इस कमी की काफी हद तक भरपाई की है। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) से जुड़े कंपोनेंट्स में मजबूत मौजूदगी रखती है, जिससे इसे लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा माना जा रहा है।
Axis Bank
देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल Axis Bank में भी म्यूचुअल फंड लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जून 2023 में जहां MF की हिस्सेदारी 21.71% थी, वह मार्च 2026 तक बढ़कर 34.11% हो गई। इसी दौरान DII की हिस्सेदारी 29.9% से बढ़कर 43.4% पहुंच गई।
दूसरी ओर FII की हिस्सेदारी में पिछले कुछ तिमाहियों में कमी देखने को मिली है और यह अब 42% पर है। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी यह संकेत देती है कि भारतीय फंड हाउस बैंक के लॉन्ग टर्म ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं।
Shriram Finance
Shriram Finance उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जहां विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अब भी बेहद मजबूत बनी हुई है। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार कंपनी में FII की हिस्सेदारी 56.1% है, जो काफी ऊंचा स्तर माना जाता है। वहीं DII की हिस्सेदारी 18.6% और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 13.07% है।
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हालांकि मार्च 2026 की तुलना में MF की हिस्सेदारी कुछ कम हुई है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की मौजूदगी मजबूत बनी हुई है। कंपनी का फोकस रिटेल फाइनेंस और कमर्शियल व्हीकल फाइनेंस पर है, जिसे लेकर निवेशकों का भरोसा कायम है।
HDFC Bank
देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में भी घरेलू म्यूचुअल फंड लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। दिसंबर 2023 में जहां MF की हिस्सेदारी 19.45% थी, वह जून 2026 तक बढ़कर 30.62% हो गई। इसी अवधि में DII की हिस्सेदारी भी 30.8% से बढ़कर 41.9% पहुंच गई।
हालांकि FII की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले घटकर 41.8% रह गई है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बैंक के प्रति भरोसे को दर्शाती है। HDFC Ltd. के विलय के बाद बैंक की ग्रोथ और लाभप्रदता पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
RBL Bank
निजी क्षेत्र के RBL Bank में भी म्यूचुअल फंड और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। सितंबर 2023 में जहां म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 13.20% थी, वह मार्च 2026 तक बढ़कर 36.76% पहुंच गई।
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इसी अवधि में DII की हिस्सेदारी भी 19.5% से बढ़कर 43.3% हो गई, जो बैंक के प्रति घरेलू संस्थागत निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, जून 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में प्रमोटर हिस्सेदारी 60% होने के बाद FII, DII और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी में बदलाव दिखता है, लेकिन इससे पहले तक घरेलू फंड हाउस लगातार बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते रहे।
शेयरहोल्डिंग पैटर्न क्यों होता है अहम?
किसी भी कंपनी में Mutual Funds, DII और FII की हिस्सेदारी केवल निवेश का आंकड़ा नहीं होती, बल्कि यह संस्थागत निवेशकों के भरोसे का भी संकेत देती है। जब म्यूचुअल फंड लगातार किसी शेयर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, तो आमतौर पर इसका मतलब होता है कि वे कंपनी की कमाई, कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। हालांकि केवल शेयरहोल्डिंग के आधार पर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति, कर्ज, कमाई की गुणवत्ता और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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