Petrol Diesel Price Hike India: कभी भी बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, इन वजहों ने बढ़ाया दबाव
Petrol Diesel Price Hike India: मध्यपूर्व संकट को लेकर जारी अनिश्चितता के चलते सरकार कभी भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें (Petrol Diesel Price) बढ़ा सकती है। ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड की हालिया रिपोर्ट “इंडिया स्ट्रैटेजी: डेल्ही डायरीज़” में इस बात का संकेत दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और पूर्व नीति-निर्माताओं के साथ हुई चर्चा में यह सामने आया कि अगर पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति संबंधी संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास दर धीमी होने का खतरा बना रहेगा। हालांकि अधिकारियों ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सीधे तौर पर कोई संकेत नहीं दिया, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार पूरे बोझ को लंबे समय तक खुद नहीं उठा पाएगी।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी की 24 घंटे में दूसरी बार बड़ी अपील, गोल्ड से लेकर पेट्रोल-डीजल और WFH तक क्या देना चाहते हैं संदेश
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अनुमान है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे तो सरकार को सीमित स्तर पर कीमतें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 10 रुपये की कटौती से सरकार को सालाना करीब 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जो GDP का लगभग 0.26 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार के लिए लंबे समय तक राहत बनाए रखना आसान नहीं होगा।
ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने FY26 के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का “इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन फंड” भी बनाया है। इसके बावजूद, तेल विपणन कंपनियों की लागत लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का ब्रेक-ईवन EBITDA मार्जिन करीब 91 रुपये प्रति लीटर है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (US EIA) के हवाले से कहा गया है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य महंगाई और परिवहन लागत भी बढ़ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 प्रतिशत बढ़ोतरी से महंगाई करीब 50 बेसिस पॉइंट बढ़ सकती है और आर्थिक विकास दर पर भी असर पड़ सकता है।
ऐसे में आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई और राजकोषीय दबाव के बीच संतुलन बनाने की होगी।

Leave a Reply