PM Modi की सोना न खरीदने की अपील के बाद चर्चा में है गोल्ड रीसाइक्लिंग, कैसे गेमचेंजर बन सकती है ये स्कीम?
Gold Recycling Scheme: भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। शादी-ब्याह हो, त्योहार हो या निवेश की बात, भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि बचत और सुरक्षा का जरिया है। लेकिन एक बड़ी चुनौती यह है कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से आयात करता है। इससे हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होता है और ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है।
हाल ही में विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने लोगों से कुछ समय के लिए सोना खरीदने को टालने की अपील की। लेकिन ज्वेलरी इंडस्ट्री का कहना है कि खरीदारी रोकना समाधान नहीं है। बल्कि इसके लिए सरकार गोल्ड रीसाइक्लिंग स्कीम और घरेलू गोल्ड मोबिलाइजेशन का विकल्प अपना सकती है।
क्या है गोल्ड रीसाइक्लिंग स्कीम?
आसान भाषा में समझें तो गोल्ड रीसाइक्लिंग स्कीम का मतलब है घरों, लॉकरों और तिजोरियों में वर्षों से पड़े निष्क्रिय सोने को फिर से आर्थिक सिस्टम में लाना।
भारत में करोड़ों टन सोना लोगों के घरों में पड़ा है, जो इस्तेमाल नहीं हो रहा। अगर इस सोने को बैंकिंग और बुलियन सिस्टम में लाया जाए, उसे शुद्ध करके दोबारा बाजार में उतारा जाए, तो नए सोने के आयात की जरूरत कम हो सकती है। यानी नया सोना विदेश से मंगाने के बजाय पुराने सोने को रिफाइन कर दोबारा इस्तेमाल करना। यही गोल्ड रीसाइक्लिंग स्कीम की बुनियाद है।
यह स्कीम काम कैसे करती है?
इस प्रक्रिया में सबसे पहले लोग अपने पुराने, टूटे-फूटे या आउटडेटेड गहने अधिकृत रिफाइनर या बैंकिंग चैनल में जमा करते हैं। इसके बाद उस सोने की जांच होती है। उसमें मौजूद दूसरी धातुओं जैसे तांबा, जिंक या चांदी को अलग किया जाता है और सोने को फिर से 22 या 24 कैरेट शुद्धता तक लाया जाता है।
फिर यही शुद्ध सोना दोबारा ज्वेलरी बनाने, गोल्ड लोन देने या बाजार में ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे सोना देश के भीतर ही घूमता रहता है और आयात पर निर्भरता घटती है।
भारत में इसकी जरूरत क्यों बढ़ गई है?
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का कहना है कि अगर सोने की खरीद को हतोत्साहित किया गया तो 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। देशभर में छोटे ज्वेलर्स, कारीगर, पॉलिशिंग यूनिट्स, डिजाइनर और सप्लाई चेन से जुड़े लाखों लोग इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं।
अगर मांग अचानक घटेगी तो रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा। AIJGF का मानना है कि खरीदारी रोकने की बजाय घरेलू गोल्ड रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना ज्यादा समझदारी होगी।
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AIJGF ने क्या सुझाव दिए हैं?
फेडरेशन ने सरकार को एक समर्पित Bullion Bank बनाने का सुझाव दिया है, जो घरेलू सोने को इकट्ठा करे, शुद्ध करे, स्टोर करे और जरूरत पड़ने पर बाजार को उपलब्ध कराए।
इसके अलावा Gold ETF को अपनी 20-30% होल्डिंग उधार देने की अनुमति देने, गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट को लोन के लिए इस्तेमाल करने और टैक्स-न्यूट्रल ट्रांसफर सिस्टम बनाने की सिफारिश की गई है। अगर ऐसा होता है तो हर साल 200-300 टन सोने के आयात की जरूरत कम हो सकती है।
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आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा?
- अगर यह स्कीम मजबूत होती है तो लोगों को पुराने गहनों पर बेहतर वैल्यू मिलेगी।
- गोल्ड लोन आसानी से मिलेगा, क्योंकि शुद्धता तय करना आसान होगा।
- ज्वेलर्स को सस्ता कच्चा माल मिलेगा और ग्राहकों को बेहतर कीमत पर नई ज्वेलरी मिल सकेगी।
- देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचेगा और रोजगार भी सुरक्षित रहेगा।

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