Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बोले- ‘इस्तीफा नहीं दूंगा, SBI कर्मचारियों को रहना चाहिए था सतर्क’
Ram Mandir Dan Chori News: अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस पूरे विवाद पर ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने मंगलवार (14 जुलाई) को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दान राशि के प्रबंधन में सुपरवाइजरी खामियों को तो स्वीकार किया। लेकिन अपने इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।
गोविंद देव गिरी महाराज ने साफ कहा कि वह इस कथित चोरी में खुद को व्यक्तिगत रूप से दोषी नहीं मानते हैं। पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने उन खबरों को दुर्भावनापूर्ण बताया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला कर लिया है।
‘मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं, मैदान छोड़कर नहीं भागूंगा’
अपने इस्तीफे के सवाल पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं इस्तीफा दूंगा। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं और मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो भाग जाते हैं। जब समय यह मांग करता है कि मुझे लड़ना चाहिए तो मैदान छोड़ना हमारे धर्म में नहीं है।’
उन्होंने अनुमान जताया कि यह कथित चोरी लगभग 3 करोड़ रुपये की हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ उनका निजी आकलन है कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। इसके साथ ही इस मामले में चल रही SIT की जांच पर भी पूरा भरोसा जताया है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारी जांच के घेरे में
गोविंद देव गिरी महाराज ने बताया कि मंदिर के दान पात्रों से एकत्र किए गए दान को संभालने और उसका लेखा-जोखा रखने की जिम्मेदारी SBI को सौंपी गई थी। उन्होंने बैंक पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए सभी लोग बैंक से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी कर्मचारियों को एसबीआई द्वारा तैनात किया गया था, ट्रस्ट द्वारा नहीं।
भले ही कुछ नियुक्तियां सिफारिशों पर की गई थीं लेकिन उनके क्रेडेंशियल्स की पुष्टि करना एसबीआई की जिम्मेदारी थी क्योंकि एसबीआई देश के अग्रणी बैंकों में से एक है। उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट को उम्मीद थी कि बैंक वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करेगा और दान की गिनती व लेखा-जोखा की निगरानी के लिए समर्पित कर्मियों को तैनात करेगा। वे कोई संत नहीं हैं बल्कि बैंक अधिकारी हैं इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए था।
चंपत राय के इस्तीफे पर दी सफाई, ‘लापरवाही’ को माना वजह
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर बात करते हुए कोषाध्यक्ष ने कहा कि चंपत राय ने स्वेच्छा से पद छोड़ा है और ट्रस्ट के संविधान के अनुसार उनका इस्तीफा स्वतः ही स्वीकृत माना गया है। इनबात को खारिज करते हुए कि राय को बलि का बकरा बनाया गया है, उन्होंने कहा कि पूर्व महासचिव की ओर से हुई लापरवाही ने इस स्थिति को पैदा करने में योगदान दिया था।
गोविंद देव गिरी महाराज ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘एक कोषाध्यक्ष के रूप में मेरी भी जिम्मेदारियां हैं। मेरा कर्तव्य ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा धन की निगरानी करना है। पांच चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमित रूप से इन खातों का सत्यापन करते हैं।’ उन्होंने साफ किया कि यह कथित गबन मंदिर के दान पात्रों में एकत्र किए गए दान से जुड़ा है न कि ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा की गई धनराशि से।
इस्तीफे के बजाय व्यवस्था सुधारने पर जोर, किए ये 5 बड़े बदलाव
नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांगों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना पर गहरा खेद है लेकिन वह इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने इस कथित गबन को भगवान राम के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने कहा कि, ‘मेरा प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं है। मेरा प्रायश्चित यह सुनिश्चित करना है कि जो गलतियां हुईं, वे कभी न दोहराई जाएं। हमने सुधारात्मक व्यवस्था लागू करना शुरू कर दिया है।’ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रस्ट ने सुरक्षा के 5 नए और कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
कैश संभालने वाले कर्मियों के लिए बिना जेब वाली यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दी गई है। सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। नकदी की गिनती को टेबल के बजाय फर्श की मैट पर स्थानांतरित कर दिया गया है। गिनती के दौरान ट्रस्ट के दो प्रतिनिधि और एसबीआई के दो अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है। कैश काउंटिंग एरिया में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी कर्मियों की सघन तलाशी ली जा रही है।
1400 करोड़ के सोने की चोरी के दावे पूरी तरह झूठे
गोविंद देव गिरी महाराज ने उन आरोपों और रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि दान में मिला 1400 करोड़ रुपये का सोना और कीमती सामान गायब हो गया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से झूठ और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई बातें कहा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि इतना सोना कौन दान करता है?
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उन्होंने जानकारी दी है कि ट्रस्ट ने दान में मिली 2926 कीमती वस्तुओं के विवरण वाली एक रजिस्टर प्रदर्शित की है। कोई भी श्रद्धालु आकर यह सत्यापित कर सकता है कि उनका चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक एसआईटी की जांच चल रही है तब तक ट्रस्ट इस मामले पर कोई वाइट पेपर जारी नहीं करेगा।
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