SBI Funds Management IPO: ग्रे मार्केट में अभी से 13% भागने लगा शेयर, 10 पॉइंट्स में 14 जुलाई से खुल रहे इश्यू के प्राइस बैंड, साइज समेत तमाम डिटेल
SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के IPO के लिए इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली हैं। यह 13 जुलाई से शुरू हो रहे सप्ताह में लॉन्च होने के लिए तैयार है। यह देश में साल 2026 में अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बनने जा रहा है। SBI फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। यह भारत की सबसे पुरानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी भी है और SBI म्यूचुअल फंड के लिए इनवेस्टमेंट मैनेजर के तौर पर काम करती है। आइए पॉइंट्स में जानते हैं इसके IPO से जुड़ी अहम बातें…
IPO का साइज
SBI फंड्स मैनेजमेंट के IPO का साइज ₹11692.91 करोड़ है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.17 लाख करोड़ होने की उम्मीद है।
ओपनिंग, क्लोजिंग और लिस्टिंग डेट
यह इश्यू 14 जुलाई को खुलने वाला है। एंकर इनवेस्टर 13 जुलाई को बोली लगा सकेंगे। IPO की क्लोजिंग 16 जुलाई को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 17 जुलाई को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयर 21 जुलाई को BSE और NSE पर लिस्ट हो सकते हैं।
प्राइस बैंड और लॉट साइज
IPO के लिए प्राइस बैंड ₹545-574 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 26 शेयर है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। लिहाजा IPO से होने वाली कमाई शेयर बेचने वालों के पास जाएगी। OFS में प्रमोटर और मौजूदा निवेशकों की ओर से 20.37 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा।
OFS में कौन बेच रहा है शेयर
OFS में प्रमोटर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 12.83 करोड़ शेयर (6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी) और पेरिस स्थित अमुंडी इंडिया होल्डिंग 7.53 करोड़ शेयर (3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी) बेचेंगे। अनुमानित वैल्यूएशन के हिसाब से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को शेयर बिक्री से लगभग ₹7,370 करोड़ हासिल होने की उम्मीद है। वहीं अमुंडी इंडिया होल्डिंग को ₹4,330 करोड़ से ₹4,400 करोड़ के बीच मिल सकते हैं।
IPO का रिजर्व हिस्सा
IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। IPO में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के लिए लगभग 1.3 करोड़ शेयर रिजर्व किए गए हैं। SBI Funds Management के पात्र कर्मचारियों के लिए ₹170 करोड़ के शेयर रिजर्व हैं। इन कर्मचारियों को प्राइस बैंड में प्रति शेयर ₹54 की छूट मिलेगी। SBI के मौजूदा शेयरहोल्डर्स को कोई छूट नहीं मिलेगी।
बुक रनिंग लीड मैनेजर
कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, जेफरीज इंडिया, ICICI सिक्योरिटीज, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, JM फाइनेंशियल, SBI कैपिटल मार्केट्स और BofA सिक्योरिटीज इस IPO के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd है।
लिस्टिंग पर ग्रे मार्केट से क्या संकेत
ग्रे मार्केट लिस्टिंग अच्छी रहने का संकेत दे रहा है। ग्रे मार्केट में SBI फंड्स मैनेजमेंट का शेयर IPO के अपर प्राइस बैंड 574 रुपये से 13.41 प्रतिशत के प्रीमियम पर लिस्ट हो सकता है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।
कंपनी में SBI के पास कितनी हिस्सेदारी
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की SBI फंड्स मैनेजमेंट में 61.76 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 36.26 प्रतिशत हिस्सेदारी अमुंडी इंडिया होल्डिंग के पास है। लिस्टिंग के बाद, SBI की हिस्सेदारी घटकर 55.46% रह जाएगी। 3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद अमुंडी के पास 32.56% हिस्सेदारी बनी रहेगी। 2004 में SBI फंड्स मैनेजमेंट में सोसाइटे जेनरेल एसेट मैनेजमेंट SA ने 37 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी। तब से यह एक जॉइंट वेंचर है। बाद में 2011 में अमुंडी एसेट मैनेजमेंट ने अपनी सब्सिडियरी अमुंडी इंडिया होल्डिंग के जरिए यह हिस्सेदारी हासिल कर ली।
SBI Funds Management की वित्तीय सेहत
अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत बढ़कर 2,432.9 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 1,933 करोड़ रुपये था। रेवेन्यू भी 23 प्रतिशत बढ़कर 3,250.6 करोड़ रुपये हो गया, जो अप्रैल-दिसंबर 2024 में 2,641.9 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का मुनाफा 2,540.2 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे 2,072.8 करोड़ रुपये से 22.5 प्रतिशत ज्यादा है। रेवेन्यू 33.7 प्रतिशत बढ़कर 3,597.8 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 2,690.6 करोड़ रुपये था।
प्रमुख जोखिम
– रेगुलेटरी बदलावों का असर एसेट मैनेजमेंट फीस और मुनाफे पर पड़ रहा है।
– Jio BlackRock और AMC बिजनेस शुरू करने वाले डिस्काउंट ब्रोकर्स जैसे नए खिलाड़ियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
– कमाई इक्विटी मार्केट के प्रदर्शन से जुड़ी है, जिससे यह बिजनेस मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है।
– पैसिव इनवेस्टिंग की ओर बढ़ता रुझान, जिसका असर फीस से होने वाली कमाई पर पड़ सकता है।
– एसेट्स अंडर मैनेजमेंट का लगभग 32% हिस्सा पैसिव फंड्स में है, जिनसे आम तौर पर कम फीस आती है।
– SBI को दी जाने वाली रॉयल्टी काफी ज्यादा है।
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