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SBI Mutual Funds IPO: सबसे बड़ी ताकत ही SBI AMC की सबसे बड़ी चुनौती? 15 प्वाइंट्स में समझें इस आईपीओ के रिस्क फैक्टर
SBI Mutual Funds IPO: सबसे बड़ी ताकत ही SBI AMC की सबसे बड़ी चुनौती? 15 प्वाइंट्स में समझें इस आईपीओ के रिस्क फैक्टर

SBI Mutual Funds IPO: सबसे बड़ी ताकत ही SBI AMC की सबसे बड़ी चुनौती? 15 प्वाइंट्स में समझें इस आईपीओ के रिस्क फैक्टर

SBI Mutual Funds IPO: देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड कंपनी का आईपीओ 14 जुलाई को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहा है। यह आईपीओ पूरी तरह से OFS होने वाला है, जिसमें कंपनी के 2 बड़े प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बेचने वाले हैं। कंपनी ने अपने इस बड़े आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 545 रुपये से 574 रुपये प्रति इक्विटी शेयर तय किया है। इसके शेयरों की फेस वैल्यू 1 रुपये है। इस आईपीओ का लॉट साइज 26 इक्विटी शेयर्स का रखा गया है। लेकिन इस आईपीओ में पैसा लगाने के पहले आसान भाषा में समझते हैं SBI Mutual Funds IPO के 15 बड़े रिस्क फैक्टर।

1. AUM घटा तो कमाई भी घटेगी

AMC का पूरा बिजनेस Assets Under Management (AUM) पर चलता है। जितना ज्यादा निवेशकों का पैसा कंपनी के पास रहेगा, उतनी ज्यादा मैनेजमेंट फीस मिलेगी। अगर बाजार गिरा या निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू किया तो कंपनी की आय पर सीधा असर पड़ेगा।

2. बाजार में गिरावट सबसे बड़ा खतरा

अगर शेयर बाजार या डेट मार्केट में लंबी गिरावट आती है तो सिर्फ AUM ही नहीं घटेगा, बल्कि SIP की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है। इससे कंपनी की फीस और मुनाफा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

3. टॉप स्कीमों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा

RHP के मुताबिक कंपनी के Top 5 Mutual Fund Schemes करीब 42.57% QAAUM और Top 10 Schemes लगभग 59.47% QAAUM का योगदान देती हैं। अगर इनमें से किसी बड़े फंड का प्रदर्शन खराब होता है तो इसका असर पूरे बिजनेस पर दिख सकता है।

4. SBI नेटवर्क ही सबसे बड़ी चुनौती

SBI की हजारों शाखाएं और करोड़ों ग्राहक कंपनी की सबसे बड़ी ताकत हैं। लेकिन अगर भविष्य में बैंक के जरिए म्यूचुअल फंड बेचने की रफ्तार कम होती है या डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल बदलता है तो नए निवेशकों को जोड़ना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसके लिए जोखिम भी बन सकती है।

5. फंड का प्रदर्शन खराब हुआ तो निवेशक निकल सकते हैं

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेशक लगातार रिटर्न की तुलना करते हैं। अगर SBI Mutual Funds की स्कीमें लगातार बेंचमार्क या दूसरी AMC से पीछे रहती हैं तो निवेशक दूसरी कंपनियों का रुख कर सकते हैं। इससे AUM और मार्केट शेयर दोनों प्रभावित होंगे।

6. SEBI के नियम बदलने का जोखिम

AMC का कारोबार पूरी तरह रेगुलेटेड है। अगर SEBI भविष्य में Total Expense Ratio (TER), कमीशन या किसी दूसरे नियम में बदलाव करता है तो कंपनी की कमाई और मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है।

7. बढ़ती प्रतिस्पर्धा से मार्जिन पर दबाव

HDFC AMC, Nippon India AMC, ICICI Prudential AMC, Kotak AMC और नई डिजिटल निवेश कंपनियां लगातार बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों को बनाए रखना पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

8. Passive Funds और ETF का बढ़ता क्रेज

निवेशक अब कम खर्च वाले ETF और Passive Funds की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर यह ट्रेंड और मजबूत हुआ तो एक्टिव फंड्स से होने वाली फीस पर दबाव बढ़ सकता है।

9. बड़े निवेशकों के पैसे निकलने का खतरा

अगर किसी बड़े संस्थागत निवेशक या कॉर्पोरेट क्लाइंट ने अचानक भारी रकम निकाल ली तो कंपनी के AUM में एक झटके में बड़ी गिरावट आ सकती है। इसका असर आय और बाजार धारणा दोनों पर पड़ेगा।

10. टेक्नोलॉजी फेल हुई तो नुकसान

पूरी AMC इंडस्ट्री डिजिटल सिस्टम पर चलती है। किसी तकनीकी गड़बड़ी, सर्वर डाउन होने या बिजनेस कंटिन्यूटी सिस्टम में दिक्कत आने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

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11. साइबर अटैक और डेटा लीक का खतरा

कंपनी के पास करोड़ों निवेशकों का वित्तीय डेटा मौजूद है। अगर साइबर अटैक या डेटा ब्रीच होता है तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ ब्रांड इमेज को भी नुकसान हो सकता है।

12. AI और ऑटोमेशन भी जोखिम से खाली नहीं

कंपनी AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बढ़ा रही है। लेकिन गलत एल्गोरिद्म, डेटा प्राइवेसी से जुड़ी समस्या या AI पर नए नियम आने से अतिरिक्त लागत और जोखिम पैदा हो सकता है।

13. आउटसोर्स पार्टनर्स पर निर्भरता

RTA, डिस्ट्रीब्यूटर और दूसरी थर्ड पार्टी एजेंसियां कंपनी के कई अहम काम संभालती हैं। अगर इनमें कोई चूक, फ्रॉड या ऑपरेशनल गड़बड़ी होती है तो इसका असर सीधे कंपनी की सेवाओं और प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।

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14. कानूनी मामलों का भी असर

RHP के मुताबिक कंपनी, उसके प्रमोटर्स और कुछ अधिकारियों से जुड़े कानूनी मामले लंबित हैं। अगर इनमें कंपनी के खिलाफ फैसला आता है तो वित्तीय नुकसान के साथ निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

15. IPO पूरी तरह Offer For Sale है

इस IPO की एक खास बात यह भी है कि इसमें कोई Fresh Issue नहीं है। पूरा इश्यू Offer For Sale (OFS) है, यानी IPO से मिलने वाला पैसा कंपनी के पास नहीं जाएगा बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा। ऐसे में कंपनी को इस इश्यू से नई पूंजी नहीं मिलेगी, जिसे वह विस्तार या नए कारोबार में लगा सके।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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