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Share Markets Report: सेंसेक्स, निफ्टी पर दबाव, फिर भी आपको घबराने की जरूरत नहीं, जानिए क्यों
Share Markets Report: सेंसेक्स, निफ्टी पर दबाव, फिर भी आपको घबराने की जरूरत नहीं, जानिए क्यों

Share Markets Report: सेंसेक्स, निफ्टी पर दबाव, फिर भी आपको घबराने की जरूरत नहीं, जानिए क्यों

शेयर बाजारों में 7 मई को जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी कभी ऊपर तो कभी नीचे चल रहे हैं। सुबह में बाजार कमजोर खुले। उसके बाद रिकवरी आई। फिर, दोनों सूचकांक लाल निशान में आ गए। 12 बजे निफ्टी 27 अंक यानी 0.11 फीसदी चढ़कर 24,356 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.02 फासदी यानी 10 अंक गिरकर 77,953 अंक पर चल रहा था। लेकिन, आपके लिए अच्छी बात है कि आपके पोर्टफोलियो पर इस गिरावट का ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है।

7 मई को बाजार के मुख्य सूचकांकों पर दबाव के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी दिखी। निफ्टी मिडकैप 0.41 फीसदी यानी 250 अंक चढ़कर 61,576 पर चल रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 0.53 फीसदी यानी 48 अंक के उछाल के साथ 9,133 पर चल रहा था। यह इस बात का संकेत है कि बाजार पर दबाव के बावजूद ज्यादातर इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में लार्जकैप से ज्यादा हिस्सेदारी स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों की होती है। इसका मतलब है कि अगर सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट है तो इसका मतलब यह नहीं है कि हर इनवेस्टर का पोर्टफोलियो नुकसान में होगा। 7 मई को कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। Bosch का शेयर करीब 4 फीसदी ऊपर चल रहा था।

Polycab India का शेयर 6.15 फीसदी ऊपर चल रहा था। One97 का शेयर 5.96 फीसदी ऊपर चल रहा था। भेल का शेयर 3.85 फीसदी मजबूत चल रहा था। बैंक ऑफ महाराष्ट्र का शेयर 2 फीसदी से ज्यादा ऊपर चल रहा था। स्मॉलकैप शेयरों में तेजस नेटवर्क्स 17 फीसदी ऊपर चल रहा था। पीरामल फार्मा 12.48 फीसदी ऊपर चल रहा था। हिंदुस्तान कॉपर में 4.63 फीसदी का उछाल था।

शेयर बाजार के लिए संकेत अच्छे हैं। 6 मई को अमेरिकी शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखी थी। लेकिन, ब्रेंट क्रूड के फिर से 100 के पार जाने से बाजार फिक्रमंद है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच डील की उम्मीद बढ़ी है। लेकिन, इस बारे में अभी कुछ ठोस नहीं हुआ है।

अमेरिका-ईरान ने अब भी बातचीत को लेकर कोई तारीख तय नहीं की है। इसके अलावा बाजार विदेशी फंडों की बिकवाली से भी चिंतित है। रुपये में 7 अप्रैल को डॉलर के मुकाबले कमजोरी दिखी। इन वजहों से मार्केट पर दबाव बढ़ गया।

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