stock-markett.online
चंद्रनाथ रथ की हर गतिविधी पर रखी जा रही थी नजर, हमले का किया रिहर्सल! ऐसे रची गई सुवेंदु के PA की हत्या की साजिश

सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में सनसनी फैल गई है। यह घटना भाजपा की चुनावी जीत के सिर्फ दो दिन बाद हुई, जब राज्य में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही हैं। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं था बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ की गई हत्या थी। जांच अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से चंद्रनाथ रथ की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। उनके आने-जाने का समय और रास्ता पहले से ट्रैक किया गया था।

बुधवार रात करीब 10 बजे, रथ विधानसभा की गाड़ी में यात्रा कर रहे थे। तभी मध्यमग्राम इलाके में एक कार ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। इसके तुरंत बाद बाइक पर आए हमलावरों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। चार गोलियां रथ के सिर, सीने और पेट में लगीं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने घटनास्थल से 9mm गोलियों के खोखे बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि हमले में कम से कम 3 से 4 लोग शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि हमलावर प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहे थे और उनके पास आधुनिक हथियार थे।

मामले की जांच अब CID को सौंप दी गई है। हत्या की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है, जिसमें CID के अधिकारी और स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अफसर शामिल हैं। पुलिस ने कई जगहों के CCTV फुटेज भी जुटाए हैं और उस कार की जानकारी निकाल ली है, जिसने रथ की गाड़ी को रोका था।

यह हत्या ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद फिर से हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। अलग-अलग जिलों से राजनीतिक बदले की भावना में कई हत्याओं की खबरें सामने आ चुकी हैं।

बंगाल में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है। अक्सर चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक झड़पें, धमकियां और हत्याएं जारी रहती हैं। 2021 विधानसभा चुनाव के बाद भी 70 से ज्यादा राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोप लगे थे और कई मामलों की जांच बाद में CBI को सौंपनी पड़ी थी।

लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या बाकी राजनीतिक हिंसा से अलग दिखती है। आमतौर पर बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा भीड़, झड़प या आगजनी के रूप में होती है, लेकिन इस मामले में जिस तरह पहले निगरानी की गई, रास्ता रोका गया और बेहद करीब से गोली मारी गई, उससे यह एक सुनियोजित “टारगेट किलिंग” लग रही है।

इस घटना ने बंगाल की नई राजनीतिक शुरुआत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राज्य में सत्ता बदल गई है, लेकिन हिंसा और डर का माहौल अब भी खत्म होता नहीं दिख रहा।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *