stock-markett.online
ममता बनर्जी थीं रुकावट, अब सुवेंदु करेंगे समाधान! बंगाल चुनाव नतीजों पर बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी का तीस्ता जल समझौते पर बड़ा बयान
ममता बनर्जी थीं रुकावट, अब सुवेंदु करेंगे समाधान! बंगाल चुनाव नतीजों पर बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी का तीस्ता जल समझौते पर बड़ा बयान

ममता बनर्जी थीं रुकावट, अब सुवेंदु करेंगे समाधान! बंगाल चुनाव नतीजों पर बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी का तीस्ता जल समझौते पर बड़ा बयान

BNP Hails BJP’s Historic Win: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का स्वागत किया है। पार्टी ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि अब दशकों से लंबित तीस्ता जल समझौता जल्द ही हकीकत बन सकेगा। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने ममता बनर्जी को इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बताया।

BNP ने सुवेंदु अधिकारी को दी बधाई

BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने सुवेंदु अधिकारी और भाजपा को इस जीत के लिए औपचारिक रूप से बधाई दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन से बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बीच संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होगा।

हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बांग्लादेश के साथ मधुर संबंधों को और मजबूती देगी। पार्टी का मानना है कि यह जीत द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और आपसी सहयोग बढ़ाने में मददगार साबित होगी।

‘तीस्ता बैराज की असली बाधा थी ममता बनर्जी’

BNP के बयान में सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तीस्ता जल बंटवारे को लेकर रहा है। पार्टी ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी के पिछले प्रशासन को इस समझौते में सबसे बड़ी रुकावट करार दिया है। BNP सचिव के अनुसार, ममता बनर्जी तीस्ता बैराज समझौते को स्थापित करने के रास्ते में एक बड़ी बाधा थीं।

अब जबकि बंगाल में भाजपा की सरकार बन रही है, बांग्लादेश को उम्मीद है कि राज्य सरकार मोदी सरकार की तीस्ता संधि को अंतिम रूप देने की इच्छा के साथ तालमेल बिठाएगी। BNP का दावा है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद अब यह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक लागू हो पाएगा।

क्यों अटका है तीस्ता जल समझौता?

तीस्ता नदी का विवाद पिछले एक दशक से अधिक समय से भारत और बांग्लादेश के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे के दौरान एक समझौते का प्रस्ताव था, जिसमें तीस्ता के जल का 37.5% बांग्लादेश और 42.5% भारत को आवंटित किया जाना था।

तब बंगाल की तत्कालीन सरकार ने कृषि हितों का हवाला देते हुए इस समझौते का कड़ा विरोध किया था, जिसके कारण इसे टालना पड़ा। फिलहाल भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां साझा हैं, लेकिन वर्तमान में केवल गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि ही प्रभावी हैं। तीस्ता संधि पश्चिम बंगाल की सहमति न मिलने के कारण लंबित है।

विचारधारा अलग, लेकिन राष्ट्रीय हित एक

अजीजुल बारी हेलाल ने स्पष्ट किया कि हालांकि BNP और भाजपा की विचारधाराएं अलग हैं, लेकिन कुछ राष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों दल एकमत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीस्ता बैराज और भारत-बांग्लादेश के सामान्य रिश्तों जैसे विषयों पर वैचारिक मतभेदों के बावजूद एकता दिखाई जा सकती है। उन्हें उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार आने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों की गति तेज होगी।

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *