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Noida Protest Updates: नोएडा में कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन से कई सेक्टरों में लगा महाजाम, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, जानें- क्या है मांग

Noida Protest Updates: नोएडा में कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन से कई सेक्टरों में लगा महाजाम, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, जानें- क्या है मांग

Last Updated on April 13, 2026 12:30, PM by Pawan

Noida Workers Protest: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में कर्मचारियों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। सोमवार (13 अप्रैल) को फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र में यह आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। अलग-अलग कंपनियों के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आक्रोश में आकर हंगामा शुरू कर दिया। मदरसन कंपनी के बाहर स्थिति बेकाबू हो गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की। कई गाड़ियों में आग लगा दी। साथ ही पूरे इलाके में ट्रैफिक पूरी तरह बाधित कर दिया।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि नोएडा के सेक्टर 63, सेक्टर 62, सेक्टर 15, फेस-दो औद्योगिक क्षेत्र, सूरजपुर, नॉलेज पार्क क्षेत्र, दादरी क्षेत्र और ईकोटेक प्रथम के औद्योगिक क्षेत्र में सुबह से ही मजदूरों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कई जगह पर श्रमिकों ने जाम लगाया। साथ ही विभिन्न स्थानों पर उनकी पुलिस के साथ नोंकझोंक भी हुई।

पुलिस पर पथराव

एक अधिकारी ने बताया कि कई जगहों पर श्रमिकों ने उग्र होकर पुलिस पर पथराव किया। कुछ कारों में आग लगाए जाने तथा कारखानों में तोड़फोड़ की भी खबर है। इसके बाद पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। आंसू गैस का भी इस्तेमाल करना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि श्रमिकों ने एक पुलिस वाहन पर भी हमला किया।

रिचा ग्लोबल कंपनी की क्या है भूमिका?

पुलिस के आला अधिकारी मौके पर भारी बल के साथ तैनात हैं। वहीं, श्रमिक भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। न्यूज एजेंसी आईएनएस के मुताबिक, इस पूरे विवाद की जड़ ‘रिचा ग्लोबल’ नाम की कंपनी को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, रिचा ग्लोबल की एक यूनिट हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित है, जहां पिछले कई दिनों से श्रमिक सैलरी वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहां कंपनी मैनेजमेंट ने 35 प्रतिशत तक सैलरी बढ़ाने को मंजूरी दी।

इसके तहत टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 20,000 और नॉन-टेक्निकल स्टाफ की सैलरी 15,000 कर दी गई। इसी फैसले के बाद नोएडा फेस-2 में स्थित रिचा ग्लोबल की चार अन्य फैक्ट्रियों में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों ने भी समान सैलरी वृद्धि की मांग शुरू कर दी। उनका कहना है कि जब कंपनी ने फरीदाबाद यूनिट में सैलरी बढ़ाया है, तो नोएडा के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। श्रमिकों की मांग है कि यहां भी सभी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 20,000 की जाए।

धीरे-धीरे यह विवाद केवल रिचा ग्लोबल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास की अन्य एक्सपोर्टर कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों में भी फैल गया। बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में कामकाज भी प्रभावित हुआ। लगातार बीते कई दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। श्रम आयुक्त समेत कई अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन के साथ घंटों तक बातचीत की थी।

कई इलाकों में भारी जाम

सोमवार को पूरे नोएडा में ट्रैफिक की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। सैकड़ों मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के कारण भारी जाम लग गया। खासकर सेक्टर 62 और आस-पास के इलाकों में महाजाम लगा हुआ है। इस आंदोलन के कारण अक्षरधाम की तरफ से नोएडा में एंट्री भी बंद कर दी गई। इससे दिल्ली से आने-जाने वालों के लिए स्थिति और भी खराब हो गई।

सेक्टर 62 को सेक्टर 16 और NH-9 से जोड़ने वाले मुख्य रास्ते प्रदर्शनकारियों ने बंद कर दिए। इसके कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन की खबरें मिलीं, जिनमें सेक्टर 62 भी शामिल था। वहां मजदूर डिवाइडर पर चढ़ गए और नारे लगाए। इससे ट्रैफिक लगभग ठप हो गया। दफ्तर जाने वालों को काफी देरी का सामना करना पड़ा।

क्या है मुख्य मांगे?

प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की मुख्य मांगे हैं कि उनकी सैलरी 20,000 रुपये मासिक किया जाए। बैंक अकाउंट में 30 नवंबर तक बोनस दिया जाए। किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक रूप से नौकरी से न निकाला जाए। ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से किया जाए। कोई कटौती न हो। हर कर्मी को साप्ताहिक अवकाश मिले रविवार को काम कराया जाए तो उसका दोगुना भुगतान किया जाए। प्रशासन का दावा है कि श्रमिकों की अधिकांश मांगों को लिखित रूप में मान लिया गया है।

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फैक्ट्री मालिकों को निर्देश भी दिए गए हैं कि वे श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करें। हालांकि, श्रमिकों का कहना है कि सेलरी वृद्धि के मुद्दे पर उन्हें अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। कंपनी मैनेजमेंट इस पर टालमटोल कर रहा है। इसी वजह से उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा।