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Monsoon 2026 Forecast: इस साल सामान्य से कम सकती है बारिश, मौसम विभाग ने अल नीनो पर ये बताया

Monsoon 2026 Forecast: इस साल सामान्य से कम सकती है बारिश, मौसम विभाग ने अल नीनो पर ये बताया

Last Updated on April 13, 2026 18:34, PM by Pawan

देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर बड़ी खबर आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को 2026 के मानसून के लिए अपना पहला दीर्घावधि पूर्वानुमान (Long Range Forecast) जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल देश में मानसून की बारिश सामान्य से नीचे (Below Normal) रहने की संभावना है।

इस अपडेट से जुड़े मौसम विभाग के आधिकारिक एक्स पोस्ट को यहां नीचे देखा जा सकता है.

कितनी होगी बारिश?

IMD के महानिदेशक के अनुसार, जून से सितंबर के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का 92% रहने का अनुमान है। इसमें 5% की मॉडल त्रुटि हो सकती है। गौरतलब है कि 1971-2020 की अवधि के आधार पर पूरे देश के लिए मानसून का LPA 87 सेंटीमीटर है।

मौसम विभाग ने बारिश की संभावनाओं को श्रेणियों में बांटा है:

  • सामान्य से नीचे बारिश: 31% संभावना
  • कम बारिश: 35% संभावना
  • सामान्य बारिश: सिर्फ 27% संभावना

किन इलाकों पर पड़ेगा असर?

IMD के लेटेस्ट प्रोजेक्शन के मुताबिक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की चाल धीमी रहेगी और सामान्य से कम बारिश होगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर भी है. पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक हो सकती है। मध्य भारत और अन्य क्षेत्र में मानसून की कमी महसूस की जा सकती है।

अल नीनो का साया और IOD की भूमिका

इस साल मानसून पर अल नीनो (El Niño) का खतरा मंडरा रहा है। IMD की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में प्रशांत महासागर में ला नीना की स्थिति कमजोर होकर तटस्थ हो रही है। लेकिन मानसून के सीजन (जून-सितंबर) के दौरान अल नीनो स्थितियां विकसित होने की अच्छी खासी संभावना है। यह स्थिति आमतौर पर भारतीय मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD): वर्तमान में हिंद महासागर में तटस्थ स्थिति है, लेकिन मानसून के अंत तक सकारात्मक IOD विकसित होने के संकेत हैं, जो मानसून के लिए थोड़ा मददगार साबित हो सकता है। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का विस्तार सामान्य से कम रहा है। आपको बता दें कि इसे ऊी मानसून के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है।

अगला अपडेट कब?

IMD मई के अंतिम सप्ताह में मानसून का दूसरा चरण जारी करेगा, जिसमें मानसून के आगमन की तारीख और क्षेत्रीय वितरण की अधिक सटीक जानकारी दी जाएगी।